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गौहरीमाफी के ग्रामीणों ने मांझी बनकर क्षतिग्रस्त पुलिया का निर्माण किया

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बरसात में टूटी पुलिया को श्रमदान करके बनाया
-- सौंग नदी उफनाने से टूट गई थी पुलिया, ग्रामीणों ने पुलिया बनाकर जिम्मेदारों को दिखाया आइना

नवीन नौटियाल
ऋषिकेश।
दृढ़ इच्छा संकल्प हो तो व्यक्ति हर वह कार्य कर सकता है, जो वह करना चाहता है। यह बात गौहरीमाफी के ग्रामीणों ने साबित कर दिखाई। ग्रामीणों ने नदी के बहाव से क्षतिग्रस्त हुई पुलिया को श्रमदान करके खुद बनाया। दरअसल बरसात के दौरान उफनाई सौंग नदी से गौहरीमाफी में आवागमन के लिए बनाई गई पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी। पुलिया टूटने से स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने मिलकर श्रमदान से मरम्मतीकरण कर जिम्मेदार विभाग को आइना दिखाया।
इसी साल बरसात में उफनाई सौंग नदी का पानी गौहरीमाफी के कुछ इलाकों में घुस गया था, जिससे काश्तकारों व ग्रामीणों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। उफनाई सौंग नदी के पानी से ग्राम सभा गौहरीमाफी के टिहरीफार्म नंबर-एक में मां आनंदमयी स्कूल के समीप बनी पुलिया भी टूट गई थी, जिसके कारण ग्रामीणों को महीनों से आवागमन में लंबी दूरी तय करने को विवश होना पड़ रहा था।
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गांव के कुछ युवाओं ने क्षतिग्रस्त पुलिया के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया व इसकी पहल कर डाली। इसके बाद महिलाएं अन्य लोग भी युवाओं साथ शामिल हो गए और पुलिया का मरम्मतीकरण कार्य शुरू किया। महिलाओं ने निर्माण कार्य में सिर पर रेत ढोकर श्रमदान में सहयोग किया। वहीं, युवाओं ने सीमेंट व रेत का मिश्रण तैयार कर पुलिया की मरम्मत की।
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श्रमदान करने वाले नरेंद्र सिंह नेगी ने बताया पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से स्कूली बच्चों व अन्य ग्रामीण लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए करीब पौन किमी लंबी दूरी तय करनी पड़ रही थी। इस कार्य में समाजसेवी कीर्ति सिंह रावत ने सीमेंट देकर सहयोग किया। बहरहाल, ग्रामीणों के श्रमदान के बाद पुलिया तैयार कर जिम्मेदार महकमे व उसके अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराया है। श्रमदान में राजीव गैरोला, सुभाष कैंतुरा, मान सिंह, सुरेंद्र कैंतुरा, विक्की दवाण, छप्पन बिष्ट, अनिल पेटवाल, शूूरवीर सिंह, चतर सिंह, मंगली कैंतुुरा, शकुंतला देवी, बसंती भंडारी और सोनी भट्ट ने भी सहयोग दिया।
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