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श्रद्धापूर्वक मनाया गया अन्नकूट का पर्व

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
गोवर्द्धन पर्वत उठाकर बृजवासियों की इंद्र के कोप से रक्षा करने पर पूरे देश की भांति धर्मनगरी में भी गोवर्द्धन पूजा तथा अन्नकूट का पर्व मनाया गया। अनेक स्थलों पर सामूहिक अन्नकूट भोज आयोजित किए गए तथा घरों के आंगन में गोवर्द्धन पर्वत उठाए श्रीकृष्ण की पूजा- अर्चना की गई। प्रात:काल नगरवासियों ने व्रत रखकर गोवर्द्धन धारी श्रीकृष्ण की पूजा की। घरों के आंगन में गोबर और आटे से श्रीकृष्ण की अनुकृति तैयार की गई। एक उंगली पर कृष्ण ने गोवर्द्धन पर्वत उठा रखा था जिसके नीचे बृजवासी छिपे हुए थे। कथाओं के अनुसार राजा इंद्र ने बृज के गोप, ग्वालों और गोपियों को बंधक बना लिया था। विरोध करने पर इंद्र ने भारी वर्षा प्रारंभ कर दी, जिसमें समूचा बृज मंडल बहने लगा और ग्वाले चीखने लगे। तब श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर विशाल गोवर्द्धन पर्वत उठाकर बृजवासियों को उसके नीचे ले लिया। पर्वत के साये में बृजवासी न केवल भीषण वर्षा के प्रकोप से बच गए, अपितु उनके घर पशुओं आदि का भी इंद्र कुछ न बिगाड़ पाए। जब भारी वर्षा के बावजूद इंद्र बृज का कुछ न बिगाड़ पाया तब इंद्र ने ध्यान लगाकर देखा कि स्वयं नारायण अवतार कृष्ण बृज की रक्षा कर रहे हैं। शर्मिदा इंद्र ने स्वयं आकर भगवान कृष्ण की अराधना की और वर्षा बंद कर दी। उन्होंने कृष्ण से आग्रह किया कि वे पर्वत को जमीन पर रख दे। कृष्ण ने इंद्र को कड़ी फटकार लगाई। तब इंद्र ने अनेक प्रकार से श्रीकृष्ण की पूजा प्रारंभ कर दी तथा उन्हें 56 प्रकार के व्यजनों के भोग लगाकर बृजवासियों को भी मनाया।
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तबसे गोवर्द्धन पूजा के साथ साथ अन्नकूट भोजों का आयोजन किया जाता है। उत्तरी हरिद्वार के प्राचीन राम मंदिर में अन्नकूट पर्व भोज का आयोजन हुआ। गीता कुटीर तपोवन में भी अन्नकूट भोज आयोजित किया गया। हरकी पैड़ी के भंडारी आश्रम में कृष्ण पूजा तथा भोज आयोजित हुआ। इसी प्रकार पंचपुरी के अनेक धर्म स्थलों पर अन्नकूट पूजा का आयोजन श्रद्धापूर्वक किया गया। कनखल और ज्वालापुर के दर्जनों स्थानों पर सामूहिक भोज आयोजित हुए। पांच दिनी पर्व का चौथा दिन भगवान श्रीकृष्ण के नाम रहा।
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