अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
दीपावली का पर्व धर्मनगरी में हर्षोल्लास के साथ माया गया। पर्व के लिए नगरवासियों ने कई दिनों तक खूब खरीदारी की। बृहस्पतिवार पूजा का दिन था। दिनभर लोगों ने एक- दूसरे के घर जाकर शुभकामना की मिठाई भेंट की। बाजारों में दीपावली के दिन भी शाम तक खरीदारों की भीड़ लगी रही। मिठाई और सोने- चांदी की दुकानों पर सर्वाधिक भीड़ दिखाई दी।
शाम होते ही लोग अपने घरों में पहुंच गए और बाजारों में सन्नाटा होना शुरू हो गया। शाम आठ बजे तक तो कई दुकानें बंद भी हो चुकी थी। लोगों ने अपने घरों के पूजा स्थलों को विभिन्न प्रकार से सजाया था। इस अवसर पर विशेष रूप से सीरस वनस्पति को पूजा स्थल पर रखा गया। मान्यता है कि यह पौधा धन का पौधा है। विधि विधान के साथ महालक्ष्मी का पूजन हुआ। अधिकांश स्थानों पर लोगों ने स्वयं ही दीपावली पूजन किया। इस अवसर पर पितरों और देवताओं के निमित्त खील बताशे तथा मिठाइयों का दान किया गया। बाद में देव और पितृ दोनों के लिए दीपदान संकल्प द्वारा हुआ। पूजित एवं संकल्पित दीयों को घर के विभिन्न स्थानों में रखा गया और दो दीये समीपवर्ती मंदिरों में भी ले जाकर रखे गए। कुछ भक्तों ने गंगा तट पर जाकर भी शाम पूजन से पूर्व दो दीपक जलाए। घरों में लक्ष्मी पूजन शाम 5:30 बजे शुरू हो गया था। गृहस्थों द्वारा पूजन का कार्य 8:30 बजे से पूर्व पूरा कर लिया गया। लक्ष्मी पूजा के बाद संन्यासियों और साधु बाबाओं की पूजा प्रारंभ हुई। अनेक अखाड़ों और आश्रमों में लक्ष्मी तथा अन्य देवताओं का पूजन दीपमालिका द्वारा किया गया। तंत्र करने वालों की पूजा आधी रात के बाद तक चलती रही। आधी रात में ही उन साधकों की साधना भी संपन्न हुई जो नवरात्र से चंडी वन में रहकर अनेक साधनाएं कर रहे थे।
लक्ष्मी पूजन के बाद नगरवासियों ने परिवार सहित बैठकर दीपावली पर्व पर विशेष रूप से बनाए गए भोजन ग्रहण किए। इसके पश्चात घरों की छतों में जाकर आतिशबाजी का दौर शुरू हो गया। पंचपुरी के सभी भागों में जोरदार आतिशबाजी हुई। यह सिलसिला अर्द्धरात्रि के बाद दो बजे तक चलता रहा। बच्चों ने आतिशबाजी का विशेष लुप्त उठाया। कालोनियों के पार्कों में भी क्षेत्रवासियों ने इकठ्ठा होकर आतिशबाजी का आनंद लूटा।