अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर निगम भवन स्वामियों को दो साल से भवन कर के बिल ही नहीं भेज पा रहा है। ऐसे में निगम को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। भवन स्वामियों पर भी बकाया भवन कर बोझ बढ़ रहा है।
दरअसल भवन कर की सेल्फ असेस्टमेंट(स्वकर) की नियमावली लागू होने के बाद से नगर निगम का कर विभाग भवन कर नियमित वार्षिक वसूली का सिस्टम ही नहीं बना पाया है और न सिस्टम पर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारी भवन कर की वसूली के लिए तभी हाथ- पैर मारते हैं जब कर्मचारी वेतन तथा बकाया देयों की मांग को लेकर हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं। नगर निगम ने वर्ष 2015-16 में स्वकर प्रणाली लागू कर भवन स्वामियों को सेल्फ असेस्टमेंट के फार्म वितरित किए थे। पहले वर्ष में करीब 23 हजार भवन स्वामियों को फार्म दिए गए थे, और वार्डवार शिविर लगाकर भवन कर जमा कराने का अभियान चलाया था। करीब 14 हजार भवन स्वामियों ने शिविरों में जाकर स्वकर का फार्म तथा भवन कर(गृहकर) जमा करा दिया था। जिससे 3 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ था। इसके बाद फिर अभियान ढीला पड़ गया। अब स्थिति यह है कि जिन लगभग 14 हजार भवन स्वामियों ने 2015-16 का भवन कर जमा करा दिया था उन्हें वर्ष 2016-17 के बिल ही नहीं भेजे गए हैं। 2015-16 में स्वकर प्रणाली लागू होने बाद गुजरे तीन साल में नगर निगम भवन स्वामियों को समय पर भवन कर का बिल भेजने तक का सिस्टम नहीं बना पाया है।
दुकानों के किराये की वसूली नहीं
नगर निगम की हरिद्वार, कनखल, ज्वालापुर क्षेत्र में 482 दुकानें हैं। जिनका कई साल से किराया ही नहीं लिया जा रहा है। लगभग दो करोड़ रुपया दुकान किराये का बकाया है। नगर निगम का रिकार्ड बताता है कि केवल 128 दुकानदारों ने ही किराया जमा किया है। नगर निगम ने जिन दुकानदारों को दुकानें देकर अपना किरायेदार बनाया था, उनमें से अधिकतर दुकानें बेच चुके हैं। सहायक नगर आयुुक्त पीके बंसल ने बताया कि किराया नहीं देने वाले दुकानदारों को अब नोटिस भेजे जा रहे हैं। जो दुकानदार किराया जमा नहीं करेंगे उनके खिलाफ बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।