अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
हरिद्वार नागरिक मंच की ओर से आयोजित हरिद्वार गंगा महोत्सव में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान पर पांच लोगों को हरिद्वार रत्न से सम्मानित किया गया, जबकि पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्म के क्षेत्र में अति उत्कृष्ट योगदान के लिए ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि को गंगा रत्न दिया गया। महोत्सव में संत सम्मेलन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की भी छटा बिखरी। हरिद्वार तथा राजस्थान की प्रतिभाओं को उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज तथा राजस्थान के मंत्री अरुण कुमार चतुर्वेदी ने सम्मानित किया।
चार दिवसीय आयोजन का मुख्य आकर्षण शुक्रवार को ही था। आयोजकों ने इस वर्ष का सबसे बड़ा गंगा रत्न सम्मान परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के परमाध्यक्ष स्वामी चिंदानन्द मुनि को दिया। हालांकि वह यह सम्मान लेने स्वयं उपस्थित नहीं हो पाए। इसके अलावा हरिद्वार की प्रख्यात साहित्यकार मोना वर्मा, शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. महावीर अग्रवाल, पत्रकारिता के क्षेत्र में कई दशक तक योगदान देने वाले वरिष्ठ पत्रकार डा. कमलकांत बुधकर को हरिद्वार रत्न दिया गया। समाजसेवा के लिए दिवंगत राममूर्ति वीर को मरणोपरांत सम्मानि दिया गया। यह सम्मान उनके पुत्र डा. संदीप कपूर ने ग्रहण किया। ललित कला के क्षेत्र में हरिद्वार की उभरती नृत्यांगना अपूर्वा दत्त को हरिद्वार रत्न दिया गया। काबीना मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि गंगा महोत्सव सरीखे आयोजन से गंगा के प्रति लोगों में जागरूकता आएगी। राज्य और केंद्र सरकार की ओर से उन्होंने गंगा की स्वच्छता के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। चयन समिति के अध्यक्ष पीएस चौहान ने कहा कि इन प्रतिभाओं को सम्मानित कर संस्था खुद को भी गौरवान्वित महसूस कर रही है। संस्थाध्यक्ष सतीश कुमार जैन ने संत समाज तथा राजस्थान संस्कृत अकादमी के पदाधिकारियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि मां गंगा के लिए कार्य करने से स्वयं मां गंगा की कृपा बरसती है। महोत्सव समिति के चेयरमैन जगदीश लाल पाहवा ने कहा कि यह आयोजन हरिद्वार की पहचान गन चुका है।
इससे पहले निरंकारी संत समागम में मसूरी के जोनल इंचार्ज संत हरभजन सिंह ने गंगा सेवा एवं राष्ट्र सेवा में समर्पित भावना से संगत की ओर से किए गए कार्यों की प्रस्तुति के साथ हरिद्वार नागरिक मंच को साधुवाद दिया। निरंकारी संत समागम में उन्होंने कहा कि धर्म की हानि नहीं हुई व्यक्तियों का एक-दूसरे से प्रेम कम हुआ जो समाजसेवा से जुड़ने के साथ ही पुन: प्रबल होगा। महोत्सव को स्वामी धर्मदेव, राजस्थान के मंत्री अरुण चतुर्वेदी, राजस्थान संस्कृत अकादमी की अध्यक्ष डा. जया दबे, महावीर अग्रवाल सहित कई संत-महापुरुषों एवं शिक्षा तथा समाजसेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी संबोधित किया। संचालन नागरिक मंच के महामंत्री देवेंद्र शर्मा ने किया। देर रात तक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की धूम रही।