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रामलीला मंचन के नौवें दिन उमड़ी श्रद्वालुओं की भारी भीड़

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थराली। रामलीला मैदान में आयोजित रामलीला के नवें दिन लंका दहन का मंचन देखने के लिए सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। रामलीला में राम सीता की सुध लेने के लिए हनुमान को लंका भेजते हैं और हनुमान लंका में अशोक वाटिका में चले जाते हैं। हनुमान राम की ओर से दी गई मुद्रिका को माता सीता को देते हैं और उनकी कुशलता बताते हुए फल खाने की आज्ञा मांगते हैं। तब हनुमान अशोक वाटिका को तहस नहस कर अक्षय कुमार सहित राक्षसों का वध कर देते हैं। मेघनाद हनुमान को ब्रह्मफांस में बांधकर रावण के दरबार में ले जाता है और रावण सभासदों की राय से हनुमान की पूंछ पर आग लगाने का आदेश देता है। इस पर हनुमान अपनी पूछ पर लगी आग से पूरी लंका में आग लगा देते हैं। इस मौके पर कांग्रेस के प्रदेश सचिव विनोद रावत, खीमानंद खंडूड़ी, नंदू बहुगुणा, व्यापार संघ अध्यक्ष संदीप रावत, सुरपाल सिंह रावत, छात्र महासंघ अध्यक्ष प्रदीप जोशी आदि मौजूद थे।

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राम ने की युद्ध की घोषणा
पीपलकोटी। ज्योति क्लब की ओर से आयोजित रामलीला के आठवें दिन रावण विभीषण संवाद के साथ रामलीला का शुभारंभ हुआ। ज्येष्ठ उप प्रमुख आयोध्या प्रसाद हटवाल और कमल किशोर डिमरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर रामलीला का शुभारंभ किया।
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रामलीला में विभीषण रावण को राम से बैर न लेने की सलाह देते हैं, लेकिन रावण उससे नाराज होकर लंका से निकल देता है। इसके बाद राम की ओर से बाली पुत्र अंगद को शांति दूत बनाकर रावण के पास भेजा जाता है। अंगद के समझाने पर भी जब रावण नहीं मानता तो अंगद जमीन पर अपना पैर जमा कर उसे जमीन से उठाने के लिए रावण के योद्धाओं का ललकारता है। जब कोई योद्धा उसके पैर को नहीं उठा पाता तो रावण स्वयं उसके पैर को उठाने के लिए आता है। इस पर वह रावण को अपने नहीं भगवान राम के चरणों में जाने की बात कहता है। इसके बाद भी जब रावण सीता को राम के पास भेजने की बात नहीं कहता तो दूसरी ओर राम युद्ध की घोषणा कर देते हैं। इस अवसर पर विनोद लाल, रजत साह, बिहारी लाल, दीप लाल साह, दीपक राणा, संतोष शाह और सुनील शाह आदि मौजूद थे।
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