श्रीनगर। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण विकास संस्थान ने हिमालयी क्षेत्र के जंगलों में ब्रायोफायटा ग्रुप के अधिपादपों की कार्बन अवशोषण में हिस्सेदारी का अध्ययन कर रहा है। ब्रायोफायट्स वातावरणीय प्रदूषण को ज्ञात करने के मुख्य सूचक हैं। इसके जरिए प्रदूषण की जानकारी मिल सकेगी।
वैज्ञानिक प्रभारी डा. आरके मैखुरी के दिशा-निर्देशन मेें अधिपादपीय ब्रायोफाइट्स के कार्बन अवशोषण में योगदान पर अध्ययन कर रहा है। संस्थान के युवा वैज्ञानिक डा. यतीश बहुगुणा बताते हैं कि कार्बन अवशोषण पर ज्यादातर शोध उच्च वर्ग (बड़े पेड़-पौधे) की वनस्पतियों पर हुए हैं। इसलिए अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ब्रायोफाइट्स (निम्न वर्ग के पादप) कितना कार्बन अवशोषण करते हैं। संस्थान शोध के जरिए कार्बन अवशोषण में अधिपादप ब्रायोफाइट्स की हिस्सेदारी उजागर करेगा। बताया कि ब्रायोफाइट्स पृथ्वी पर कार्बन सिंक (अवशोषण) का कार्य करते हैं। यह पादप पृथ्वी पर उगने वाली अति प्राचीन वनस्पतियां हैं। डा. बहुगुणा बताते हैं कि प्रतिकूल परिस्थितियों में यह लंबे समय तक जीवित रहने की क्षमता रखते हैं। ब्रायोफाइट्स में क्यूटिकल की प्रतिरक्षा परत नहीं होती है, जिससे इनकी कोशिकाएं बाहरी वातावरण के सीधे संपर्क में होती हैं। इसी कारण ब्रायोफायट्स वातावरणीय प्रदूषण को ज्ञात करने के मुख्य सूचक है। बताया कि अध्ययन में इसकी हिस्सेदारी को उजागर किया जाएगा।