श्रीनगर। मुज्जफरनगर कांड की वर्षगांठ पर प्रगतिशील जनमंच ने सामूहिक उपवास रखा। सामूहिक उपवास करते हुए उत्तराखंड आंदोलनकारियों पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर आक्रोश जताया। उन्होंने दोषियों को सजा दिलाने के लिए राज्य सरकार से पहल करने की मांग की। इस मौके पर उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारियों के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
सोमवार को मुज्जफरनगर कांड की 23 वीं वर्षगांठ पर विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए आंदोलन कर रहे लोगों ने प्रगतिशील जनमंच के बैनर तले गोला पार्क में धरना दिया। इस मौके पर एनआईटी स्थायी परिसर निर्माण, शुद्ध पेयजल आपूर्ति और चिकित्सकों की मांग को लेकर आंदोलन की आगामी रणनीति घोषित की गई। बताया गया कि 25 अक्तूबर की शाम रैली निकालकर जन सभा की जाएगी। जबकि 5 नवंबर से क्रमिक अनशन और 25 नवंबर से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। गिन्नी सेमवाल, लक्ष्मी गुप्ता, देवेश्वरी बिष्ट, विनोद मैठाणी, प्रेमदत्त नौटियाल, मदन मोहन नौटियाल, बुद्धि रांगड़, सुलोचना, विमला कोठियाल, अनिल स्वामी, खीम सिंह चौहान, प्रभा जखमोला और सुनीता पंवार आदि ने सामूहिक उपवास किया। जनसभा का संचालन झाबर सिंह रावत ने किया। वहीं मुजफ्फरनगर कांड की 23 वीं वर्षी पर आइसा कार्यकर्ताओं ने उप्र की तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार का पुतला फूंका। आइसा की नगर अध्यक्ष शिवानी पांडे ने कहा कि राज्य बनने के 17 साल भी दोषियों को सजा नहीं मिली है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। पुतला फूंकने वालों में अतुल सती, प्रवेश, सूरज, पंकज, दर्शन, राहुल आदि शामिल थे। वहीं मुजफ्फर नगर कांड की वर्षी पर डीएसओ दात्र संगठन की ओर से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जनगीतों के माध्यम से आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी। मौके पर डीएसओ के कार्यकर्ताओं ने जनगीत के माध्यम से उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में मुकेश सेमवाल, कुसुम पांडे, भारती जोशी, प्ऱियका, प्रवीण भंडारी आदि मौजूद थे।
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