गौचर। यहां आईटीबीपी (भारत तिब्बत सीमा पुलिस) आठवीं वाहिनी की सैनिक सभा में पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आईटीबीपी के जवानों को जल्द ही 100 आधुनिक स्नो स्कूटर उपलब्ध कराए जाएंगे। सीमा की चौकसी कर रहे जवानों के लिए जो भी जरूरी संसाधन होंगे, सरकार उनको प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराएगी।
केदारनाथ दर्शन करने के बाद रविवार को यहां पहुंचे राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत चीन सीमा की सुरक्षा अन्य सीमा क्षेत्रों की तुलना में काफी चुनौतीपूर्ण है। आईटीबीपी पूरे शान और विश्वसनीयता के साथ कर यह कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सभी अर्द्धसैनिक बलों की समस्याओं को दूर करने का हरसंभव प्रयास कर रही है। बल के जवानों और अधिकारियों की हौसलाअफजाई करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि जो कठिनाइयों का सीना चीरकर अपना रास्ता बना दे उसे आईटीबीपी कहते हैं। आईटीबीपी के महानिदेशक आरके पंचनंदा ने कहा कि राजनाथ सिंह देश के पहले ऐसे गृहमंत्री हैं जिन्होंने सीमा की अग्रिम चौकियों पर पहुंचकर इन वीर जवानों की कठिनाइयों को समझा और सैनिकों का मनोबल बढ़ाया। महानिदेशक ने गृहमंत्री को केदारनाथ मंदिर की कलाकृति स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की। कमांडेंट गिरीश चंद्र पुरोहित ने वाहिनी की गतिविधियों से गृहमंत्री को अवगत कराया।
छात्रों के साथ चलाया झाड़ू, वाहिनी के लिए दिए दो लाख
गौचर। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आईटीबीपी वाहिनी के प्रवेश द्वार पर जवानों और स्कूली बच्चों की स्वच्छता रैली को हरी झंडी दिखाई। इस मौके पर गृहमंत्री ने बच्चों के साथ झाड़ू पकड़कर सफाई की और जवानों व छात्र-छात्राओं को स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिए प्रेरित किया। आफिसर मेस में बड़े खाने को लेकर आईटीबीपी के कमांडेंट को दो लाख का चेक देकर वाहिनी के जवानों को पुरस्कृत किया।
सीमा पर अग्रिम चौकियों की जानकारी ली
गौचर। सैनिक सभास्थल के बाहर आईटीबीपी द्वारा लगाई गई फोटो प्रदर्शनी का जायजा लेते हुए गृहमंत्री ने अधिकारियों से सीमा पर लेप्चापास, गीलडुंग, गमशाली, सुमना, नीतिपास, बमलास, बल्चाधुरापास, गोटिंग, छोजन आदि अग्रिम चौकियों की जानकारी ली। उन्होंने वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान आईटीबीपी जवानों द्वारा किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन की फोटो प्रदर्शनी भी देखी। ब्यूरो