अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
कर्मचारियों की बहाली, भुगतान और डिपो खोलने की मांग को लेकर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई )श्रमिक संघ के कर्मचारियों ने हरिद्वार डिपो में धरना- प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कोर्ट के आदेेश के बावजूद एफसीआई के अधिकारी हठधर्मिता कर रहे हैं। आरोप लगाया कि एफसीआई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रही है।
वर्ष 2004 में एफसीआई के हरिद्वार डिपो को बिना वजह सील कर दिया गया था। डिपो में कार्यरत 200 कर्मचारियों का 15 माह का मानदेय भी नहीं दिया गया। इसके विरोध में एफसीआई श्रमिक संघ ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने फैसला श्रमिकों के हितों में सुनाया था। एफसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। एडवोकेट एमसी पंत ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने एफसीआई को कर्मचारियों के भुगतान करने का आदेश अप्रैल में दिया था। साथ ही कर्मचारियों की बहाली और हरिद्वार डिपो को दोबारा शुरू करने का आदेश दिए है।
बुधवार को श्रमिक संघ से जुड़े कर्मचारियों ने हरिद्वार डिपो पहुंचकर धरना प्रदर्शन करते हुए एफसीआई के खिलाफ नारेेबाजी की। अध्यक्ष हरीश तिवारी ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवेहलना की जा रही है। आदेश के पांच माह बाद भी कर्मचारियों को उनका हक नहीं दिया जा रहा हैं। उन्होंने कहा कि एफसीआई की हठधर्मिता से कर्मचारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों में सरोज सिंह सैनी, राजवीर सिंह, कृष्णानंद भारती, नेनपाल, युसूफ, पुष्पेंद्र, सतीश, राम बिहारी, रामचंद्र समेत तमाम कर्मचारी मौजूद रहे। बुधवार को कर्मचारियों का केस लड़ रहे हाईकोर्ट के अधिवक्ता एमपी पंत भी हरिद्वार डिपो पहुंचे और कर्मचारियों के साथ धरने प्रदर्शन में शामिल हुए।
ट्रांसपोर्ट पर खर्च कर रहा हर महीने एक करोड़
हरिद्वार। भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़ने का दावा करने वाली केंद्र सरकार का फूड कारपोरेशन (एफसीआई) हरिद्वार का डिपो बंद कर खाद्यान्न के ट्रांसर्पोटेशन पर एक करोड़ रुपये प्रतिमाह खर्च कर रहा है। इस डिपो को 2004 में बंद कर दिया गया था, तब से हरिद्वार के खाद्यान्न को पहले देहरादून भेजा जाता है और फिर वहां से यहां भेजा जाता है। इससे ट्रांसर्पोटेशन के नाम पर करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है।
एफसीआई श्रमिक संघ डिपो बंद होने से आजीविका गंवा बैठे 200 पल्लेदार श्रमिकों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एमसी पंत ने बताया कि एफसीआई हरिद्वार डिपो के भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच की गई। सीबीआई के कोर्ट कमिश्नर ने 2011 में डिपो का निरीक्षण किया था, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें रिकार्ड नहीं दिखाया। कोर्ट कमिश्नर ने सीबीआई कोर्ट में भी इसकी रिपोर्ट दी थी। कोर्ट ने डिपो को बंद करने की एफसीआई की कार्रव्ज्ञई को अवैध करार दिया था। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के कारण डिपो को बंद किया गया और अब उसके स्थान पर प्रति माह ट्रांसर्पोटेशन के नाम पर प्रति माह एक करोड़ रुपये खर्च कर दूसरा बड़ा गोलमाल किया जा रहा है।