सागर जोशी
हरिद्वार।
पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास को लेकर शासन- प्रशासन की गभीरता का अहसास इससे ही लगाया जा सकता है कि हरिद्वार में टूरिस्ट सर्किट बनाने की योजना परवान नहीं चढ़ पाई है। दो साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रुड़की क्षेत्र को अति महत्वपूर्ण टूरिज्म सर्किट के रूप में विकसित करने की योजना की घोषणा की थी। उनका विजन हरिद्वार के धार्मिक और रुड़की के पर्यटन को बढ़ावा देकर जिले का समग्र विकास करना था।
रावत ने धनौरी से रुड़की तक बंद गंगनहर को क्याकिंग जैसे रोमांचक खेल शुरू कराने के लिए विकसित करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए उन्होंने यूपी सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर प्रस्ताव तैयार करने को कहा था। इसकी वजह गंगनहर का स्वामित्व यूपी सिंचाई विभाग के पास होना था। बावजूद इसके अधिकारी चुपी ही साधे रहे। ऐसे में पर्यटकों को आकर्षित करने की यह महत्वाकांक्षी योजना फाइलों से बाहर ही नहीं निकल पाई है।
भगवानपुर और घाड़ क्षेत्र के सिकरोडा गांव में स्थित मुगल काल की पुरानी इमारतें, रुड़की के सुनहरा गांव स्थित शहीदों का स्मृति स्थल वह पेड़ जिस पर कई लोगों ने अंग्रेजों ने फांसी पर लटका दिया था को विकसित करने की योजना भी परवान नहीं चढ़ पाई। कुंजाबहादरपुर स्थित राजा विजय सिंह का स्मारक स्थल और लंढौरा स्थित मुगल सम्राट जहांगीर के जमाने के पौराणिक किले को विकसित कर नया सर्किट बनाने की योजना पर भी काम आगे नहीं बढ़ा।
खंडहर बन गया पर्यटन विभाग का केंद्र
हरिद्वार। पर्यटन विभाग का मेला नियंत्रण कक्ष के पास स्थित आधुनिक केंद्र खंडहर बन गया है। इस केंद्र से न तो कोई कमाई हुई और न ही पयर्टन को बढ़ावा देने का ही कोई काम हुआ। वर्ष 2009 में बनकर तैयार हुआ यह केंद्र खंडहर बन गया है। इस केंद्र को एक साल तक एसडीआरएफ ने इस्तेमाल किया। जब एसडीआरएफ ने केंद्र छोड़ा तो लाखों रुपये का बिजली का बिल भी पर्यटन विभाग के ऊपर जुड़ गया था। इस केंद्र की लोकेशन गंगा से सटी हुई होने से यह आमदनी का भी बड़ा जरिया हो सकता है।
डीएम के विजन ने बढ़ाई उम्मीद
जिलाधिकारी दीपक रावत की श्यामपुर क्षेत्र की झिलमिल झील को विकसित करने की योजना है। इस योजना से आसपास के गांवों को जोड़ा जाएगा, ताकि सजनपुर समेत लालढांग के कई गांवों को इससे लाभ मिल सकेगा। झिलमिल झील को डेवलप करने पर पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा। जिलाधिकारी की इस योजना से ग्रामीणों में उत्सुकता है, साथ ही ग्रामीणों की रोजगार के लिए उम्मीद भी जगी है।