अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि हिंदी भाषा का महत्व पूरा विश्व समझ चुका है। दुनिया के कई देशों में आज हिंदी को अपनाया जा रहा है। विदेशों में कई शिक्षण संस्थानों में भी हिंदी को पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किया गया है। हम सबको हिंदी पर गर्व करते हुए अपने रोजमर्रा के कामों को हिंदी में करना चाहिए।
मदन कौशिक रविवार को पतंजलि विश्वविद्यालय और हिंदी संगम प्रतिष्ठान की ओर से ‘विश्व में हिंदी शिक्षण, नए आयाम- नई दृष्टि’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि विश्व में भारतीय बाजार की व्यापकता की तरह ही हिंदी भी व्यापक रूप में स्थापित हो रही है। उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि अपनी जन्मभूमि की तरह ही अपनी मातृभाषा को भी आदर और सम्मान दें। राज्य सरकार की ओर से उन्होंने हिंदी के प्रोत्साहन को बढ़ावा देने की बात कही। कहा कि मातृ भाषा से ही हमारी पहचान होती है। न्यूयार्क विश्वविद्यालय की प्रो. गैब्रिएला निक इलेवा ने भी हिंदी के प्रभाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिंदी का व्यापक दायरा है।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक अशोक ओझा, आचार्य प्रद्युम्न, गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय के कुलपति सुरेंद्र कुमार, डा. ब्रह्मानंद, डा. वाचस्पति कुलवंत, डा. गिरीश रंजन तिवारी और हेमा ओझा आदि ने हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार पर बल दिया।