श्रीनगर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) उत्तराखंड के स्थायी परिसर के चयनित भूमि को देखने आई टीम एक घंटे में ही सुमाड़ी का निरीक्षण कर निकल गई। टीम ने मौके पर जाकर एनआईटी के अधिकारियों/फैकल्टी से नक्शे के मुताबिक जानकारियां लीं। वहीं, एनआईटी के स्थायी परिसर के लिए आंदोलन चला रहे प्रगतिशील जनमंच के पदाधिकारियों ने शीघ्र निर्माण की मांग की।
शुक्रवार का मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) की ओर से नियुक्त अधिकारी एनआईटी के स्थायी कैंपस की चयनित भूमि को देखने पहुंचे। टीम में शामिल सीपीडब्लूडी के मुख्य अभियंता देवेंद्र गर्ग और निदेशक एनआईटी (प्लानिंग) संदीप शर्मा ने एनआईटी के कुलसचिव कर्नल सुखपाल सिंह और फैकल्टी से अधिग्रहीत भूमि की जानकारी ली। श्रीनगर-क्वीसू-सुमाड़ी मार्ग से चयनित स्थल में पहुंचने पर एनबीसीसी की ओर से बनाए गए मैप के आधार पर प्रस्तावित निर्माण कार्यों के बारे में बताया।
टीम ने जगह-जगह रुककर जानकारियां लीं। टीम ने सुमाड़ी गांव के नीचे खंडाह के समीप समतल भूमि के बारे में भी पूछा। इस पर मुख्य विकास अधिकारी विजय जोगदड़े ने कहा कि यदि जरुरत पड़ी तो इसके अधिग्रहण का प्रस्ताव भी बनाया जा सकता है।
चीफ इंजीनियर गर्ग ने बताया कि टीम सिर्फ साइट का निरीक्षण करने आई है। इस मौके पर एसडीएम मायादत्त जोशी, तहसीलदार सुनील राज आदि मौजूद थे।
भूस्खलन को बताया सामान्य
श्रीनगर। सुमाड़ी में प्रस्तावित भूमि पर एनआईटी ने तारबाड़ की है। लगभग तीन साल पूर्व खंडाह-सुमाड़ी मार्ग पर भूस्खलन से बाड़ के 4-5 पिलर के नीचे भूस्खलन हुआ। सुमाड़ी की जमीन को अनुपयुक्त बताने के लिए भेजी गई रिपोर्ट में इसका बढ़ा-चढ़ाकर जिक्र किया गया। शुक्रवार को निरीक्षण के लिए पहुंची टीम को एनआईटी के अधिकारियों ने दिखाया। इसको टीम ने सामान्य घटना बताया। टीम का कहना था कि यह स्थायी दीवार नहीं है, पिलर को सामान्य तरीके से गाड़ा गया था।
टीम के तूफानी दौरे पर उठे सवाल
संदीप थपलियाल
श्रीनगर। एनआईटी उत्तराखंड के स्थायी कैंपस के चयनित भूमि को देखने आई टीम को एनआईटी के अधिकारी मुख्य मार्ग के बजाय लिंक मोटर मार्ग से ले गए। इस मार्ग को स्थानीय निवासी भी कभी-कभार प्रयोग करते हैं। इसी प्रकार 125 हेक्टेयर जमीन का निरीक्षण एक घंटे में ही हो गया। टीम में शामिल लोगों ने सड़क से ही सब कुछ देख लिया।
प्रशासन के अनुरोध पर केंद्रीय गढ़वाल विवि के भूविज्ञानी प्रो. वाईएस सुंदरियाल भी आए, लेकिन भ्रमण के दौरान उनसे कोई राय नहीं ली गई। पूरा घटनाक्रम कई सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का कहना है कि अधिकारियों ने तूफानी दौरे में जो देखा, वह दिल्ली में बैठकर अपने कंप्यूटर से भी देख सकते थे।
शुक्रवार को होने वाले दौरे की जानकारी मीडिया और स्थानीय लोगों से छिपाई जा रही थी। लेकिन यह सूचना लीक हो गई। प्रशासन के निर्देश पर राजस्व विभाग के अधिकारी चयनित भूमि के शुरुआती प्वाइंट (खंडाह-सुमाड़ी मार्ग) पर कागज-पत्रों के साथ ही सुबह खड़े हो गए थे। लेकिन एनआईटी के अधिकारी उन्हे श्रीनगर-क्वीसू- सुमाड़ी मार्ग से ले गए। श्रीनगर से क्वीसू तक मार्ग की स्थिति ठीक है, लेकिन भूधंसाव से इसकी स्थिति खराब है। इसके बाद क्वीसू से सुमाड़ी तक कच्चा लिंक मार्ग है जो कच्चा है और इन दिनों जगह-जगह भूस्खलन से बुरी हालत में है। भविष्य में यदि एनआईटी बनता है, तो वहां जाने के लिए इस मार्ग का प्रयोग नहीं होना है क्योंकि यह ठीक विपरीत दिशा में है।
मुख्य मार्ग के बजाय लिंक मार्ग से टीम को लाने पर प्रगतिशील जनमंच ने ऐतराज भी जताया। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि जानबूझकर उन्हें गलत रास्ते से लाया गया है। वहीं, कहा गया था कि टीम में सीबीआरआई रुड़की (केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान) के विशेषज्ञ भी होंगे, लेकिन सीबीआरआई से कोई नहीं पहुंचा।
प्रगतिशील जनमंच के अध्यक्ष अनिल स्वामी का कहना है कि श्रीनगर-खंडाह-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग है। खंडाह से सुमाड़ी के लिए अच्छी खासी सड़क है। इसके उलट टीम को ऐसे मार्ग से ले जाया गया, जो निर्माणाधीन है और विपरीत दिशा में है। इससे अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठते हैं। साफ है कि एनआईटी के अधिकारी चाहते थे कि टीम सड़क की स्थिति देखकर जगह के लिए गलत छवि बना ले। ताकि चयनित स्थान में पेच फंस जाए।