‘इन बाबाओं से मेरा विश्वास उठने लगा है’
-- राजभाषा दिवस पर आवाज संस्था की ओर से काव्य गोष्ठी आयोजित
अमर उजाला ब्यूरो
मुनिकीरेती । राजभाषा दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय स्टेट बैंक, मुनिकीरेती शाखा में आवाज साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कवियों ने विभिन्न रचनाओं के माध्यम से राजनीति व व्यवस्था पर तंज कसे। बैंक प्रबंधक व साहित्यकार महेश चिटकारिया की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी के दौरान संस्था के अध्यक्ष अशोक क्रेजी ने ‘जिस देश में होता है राष्ट्रभाषा का अपमान, विश्व में कभी मिलता नहीं उनको मान सम्मान’ रचना के जरिए जोरदार तंज कसे। कवि प्रबोध उनियाल ने ‘गम भी है तो गुनगुनाइए दर्द मिट जाएगा मुस्कराइए’ रचना पेश की।
रामकृष्ण पोखरियाल ने ‘आस्था का पर्वत दरकने लगा है, इन बाबाओं से मेरा विश्वास उठने लगा है’ के जरिए कलियुगी बाबाओं की हकीकत बयां की। डा. सुनील थपलियाल ने ‘हिम श्रृंखला से निकली गंगा दूर सागर जाती, जब चलते-चलते सागर में खो जाती’ प्रस्तुति के जरिए मोक्षदायिनी के संरक्षण का संदेश दिया। वहीं कवि धनेश कोठारी ने ‘ये जो निजाम है तुझको माफ कर देगा खुद सोच तू खुद को माफ कर देगा’ रचना के जरिए राजनीतिक पार्टियों की दोगली नीतियों व नैतिकता पर चोट की।
कवि दिनेश सती ने ‘काश्मीर की केशर क्यारी भारत के जन-जन को प्यारी’, साहित्यकार महेश चिटकारिया ने ‘क्यों कुछ शब्द निशब्द हो जाते हैं’ रचना प्रस्तुत की। इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष अशोक क्रेजी ने बताया कि संस्था की ओर से 17 सितंबर को ऋषिकेश नगर पालिका सभागार में रचनाकार महेेश चिटकारिया द्वारा रचित पुस्तक परछाईयों के प्रतिबिंब का विमोचन किया जाएगा। इस अवसर पर बुद्धिराम, दीपिका, अरुण जैन, नरेंद्र रयाल, शिवप्रसाद बहुगुणा, सुशील नौटियाल, धनीराम बिंजोला, रवि शास्त्री आदि मौजूद थे।