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हेली सुविधा मिले तो सीमावर्ती क्षेत्रों में सेहत सुविधाएं देगा एम्स
-- एम्स के निदेशक ने मुख्य सचिव से की मुलाकात, रखा प्रस्ताव
-- सुविधाएं बढ़ाने के लिए राज्य सरकार से फिर मांगी संस्थान के लिए भूमि
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
पहाड़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में लड़खड़ाती सेहत सुविधा के कारण लोगों का दर्द अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश को दिखने लगा है। निदेशक प्रोफेसर डा. रविकांत ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव एस रामास्वामी से मुलाकात कर प्रस्ताव रखा है कि यदि सरकार एम्स के डॉक्टरों को हेली सेवा देती है तो डॉक्टर सीमावर्ती क्षेत्रों में जाकर नियमित स्वास्थ्य सेवाएं देने को तैयार हैं। एम्स निदेशक की ओर से दूसरी बार सीएस के समक्ष यह प्रस्ताव रखा है। उन्होंने इसके लिए सरकार से एम्स परिसर में हेलीपैड बनाने को कहा है।
बृहस्पतिवार को सीएस एस रामास्वामी से मिले एम्स निदेशक डा. रविकांत ने उन्हें संस्थान में संचालित विभिन्न स्नातकोत्तर व डॉक्टरेट आदि कोर्स के बारे में जानकारी दी। साथ ही उन्हें संस्थान द्वारा राज्य सरकार के चिकित्सालयों में उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सकीय सेवाओं से अवगत कराया। बताया कि एम्स भविष्य में भी उक्त सेवाएं नियमित रूप से जारी रखेगा। एम्स निदेशक ने मुख्य सचिव से पहाड़ के सुदूरवर्ती इलाकों में चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव में लोगों को आने वाली दिक्कतों की जानकारी भी दी।
उन्होंने पहाड़ों व मैदानी क्षेत्रों से एम्स में आने वाले रोगियों के ठहरने के लिए एम्स के समीप रैन बसेरा निर्माण के लिए 5 से 10 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने को कहा है। बताया कि उक्त मांग पूर्व में मुख्यमंत्री के समक्ष रखी जा चुकी है, जिस पर उन्हें जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया गया था। भारत सरकार द्वारा एम्स में अत्याधुनिक कैंसर सेंटर, न्यूरो सेंटर आदि जरूरी केंद्रों की मंजूरी मिल चुकी है, मगर भूमि के अभाव में उक्त योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। लिहाजा एम्स प्रशासन ने सरकार से इसके लिए 200 एकड़ भूमि की मांग की है। एम्स निदेशक ने बताया कि उक्त तमाम बिंदुओं पर सीएस रामास्वामी ने शीघ्र कार्रवाई करने का भरोसा दिया है। इस अवसर पर अंशुमान गुप्ता व एम्स के जन संपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल भी मौजूद थे।