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हजारों की आबादी गंगातट पर खुले में शौच करने को मजबूर

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रतनमणी डोभाल
हरिद्वार।
नगर निगम क्षेत्र में केंद्र सरकार की लोकलुभावनी एक भी योजना साकार नहीं हो पा रही है। धर्मनगरी में केंद्र सरकार का खुले में शौच मुक्ति (ओडीएफ) का अभियान कहीं नजर नहीं आ रहा है। गंगा किनारे, मेला मैदानों में झुुग्गी-झोपड़ी में रहने वाली हजारों की आबादी खुले में शौच करने को बाध्य है। इससे गंगा भी प्रदूषित हो रही है। खुले में शौच मुक्त के अंतर्गत एक भी नया सार्वजनिक शौचालय नहीं बनाया गया है।
खुले में शौच करने को मजबूर हजारों की आबादी के लिए नए शौचालय बनाने की भी कोई योजना उसके पास नहीं है। सप्तसरोवर, दूधियाबंद, लालजीवाला, चंडीघाट, बैरागी कैंप, दक्षद्वीप के सामने, इधर गंगा नगर की पटरी के साथ पुल जटवाड़ा ज्वालापुर से भी आगे तक हजारों की आबादी अतिक्रमण कर निवास कर रही है। इनका दैनिक नित्यक्रम गंगातट एवं गंगा के मेला मैदानों में बेरोकटोक होता है। दूसरे राज्यों से रोजगार की तलाश में आकर बसी हजारों की इस आबादी के लिए एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है। वोटबैंक वाली इन अवैध बस्तियों को गंगा किनारे से हटाने की कार्रवाई प्रशासन नहीं कर पाता है। ऐसे में धर्मनगरी को खुले में शौच मुक्त नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा के केंद्र सरकार का स्वच्छ भारत अभियान, नमामि गंगे योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, राष्ट्रीय आजीविका मिशन आदि योजनाओं को भी नगर निगम अभी छूूूू नहीं पा रहा है।
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एक भी शौचालय को नहीं किया कब्जामुक्त
वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मुख्य विकास अधिकारी, नगर आयुक्त तथा एक पुलिस इंस्पेक्टर की जांच कमेटी बनाई थी। जिसको तीर्थयात्रियों एवं जन सामान्य की सुविधा के लिए शहर के अंदर बने सरकारी सार्वजनिक शौचालयों की जांच करने और कब्जों से मुक्त कराकर उन्हें उपयोग लायक बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। इस कमेटी ने शौचालयों की जांच करने पर कहीं बकरी बंधी पाई, कहीं खाना बनते पाया, कहीं ब्यूटी पार्लर की दुकान चलती पाई थी और किसी शौचालयों को ही निजी आवास में परिवर्तित करना पाया था, परंतु कमेटी ने एक भी शौचालय को न खाली कराया और न जन उपयोग लायक बनाया है।
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नगर निगम क्षेत्र को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। अब तक 10 वार्डों को खुले में शौच मुक्त किया जा चुका है। दिसंबर तक सभी 30 वार्डों को ओडीएफ बना दिया जाएगा। झुग्गी-झोपड़ियों में मेला मैदानों व गंगा किनारे निवासरत आबादी का भी सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के बाद उनके लिए भी खुले में शौच मुक्त योजना के अंतर्गत शौचालय निर्माण की योजना बनाई जाएगी।
डा. प्रवीण कुमार, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
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