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जलवाहिनियों की लीकेज नहीं संभाल पा रहा जल संस्थान

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
पेयजल लाइनों की लीकेज की समस्या गंभीर होती जा रही है। जल संस्थान लीकेज पर पार नहीं पा रहा है। लीकेज से जहां जगह-जगह पानी बरबाद हो रहा है, वहीं लीकेज से पीने का पानी दूषित होने से लोग जल जनित बीमारियों के शिकार भी हो रहे हैं। जल संस्थान की परेशानी जल निगम की ओर से कुंभ 2010 में डाली गई पेयजल लाइनें बढ़ा रही हैं।
पेयजल निगम कुंभ के दौरान डाली गई पेयजल लाइनों को जल संस्थान के हैंडओवर कर पल्ला झाड़ लिया है। पेयजल निगम अब इन लाइनों की मरम्मत के लिए जल संस्थान को सामान भी नहीं दे रहा है। सप्तऋषि आश्रम महाविद्यालय के सामने राइजिंग मेन लाइन कई दिन से लीकेज है। आश्रम प्रबंधक की ओर से लिखित सूचना देने के बाद भी लीकेज ठीक नहीं किया जा रहा है। जल संस्थान के इंजीनियर का कहना है कि लाइन को ठीक करने के लिए उनके पास सामान नहीं है और जल निगम सामान देने को तैयार नहीं हैं। शांतिकुंज क्षेत्र में हाईवे पर दो साल से लीकेज की समस्या को दूर नहीं किया जा सका है। लाला रामकुमार-विमला देवी धर्मशाला के बगल की पानी लाइन में भी लीकेज है। इस लीकेज का पानी सड़क को भी बार-बार उखाड़ रहा है। इस ब्रांच लाइन को भी पेयजल निगम ने डाला था। बिल्वकेश्वर कालोनी की पेयजल लाइन में भी लीकेज की समस्या से लोग परेशान है। जल संस्थान ने इस लीकेज को ठीक कराने का काम शुरू कर रखा है। जल संस्थान के अधिकारियों का आरोप है कि पेयजल निगम ने जो लाइनें डाली थीं उनमें से अधिकतर को चालू नहीं किया गया है। जिस भी नई पाइप लाइन को चालू करने का प्रयास किया गया, लीकेज निकलने पर उसको बीच में ही छोड़ दिया गया है। करोड़ों की पेयजल अभी भी जमीन के अंदर मृत पड़ी हैं।
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पेयजल लाइन की जांच की जाएगी
कुंभ में डाली गई पेयजल लाइनों की लीकेज की शिकायत को दूर करने के लिए उनका निरीक्षण किया जाएगा। जांच में पेयजल निगम की पाइप लाइन मृत पाई जाती है तो इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी जाएगी ताकि लाइनों को चालू कराया जा सके। हर की पैड़ी क्षेत्र में भी कुछ लाइनों को डैड कर छोड़ा गया है, हालांकि इसकी जानकारी ली जा रही है। उपभोक्ताओं को शुद्ध जलापूर्ति सुनिश्चित करना हमारा दायित्व है। जहां कहीं पेयजल निगम के सहयोग की जरूरत होगी वह उससे लिया जाएगा। - नरेशपाल अधिशासी अभियंता, उत्तराखंड जल संस्थान हरिद्वार।
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