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जोर शोर से चल रही रामलीलाओं की रिर्हसल

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
आश्विन मास में होने वाली रामलीलाएं अब करीब आ गई हैं। इन दिनों रामलीलाओं की रिहर्सल जोर शोर से चल रही हैं। रामलीलाओं के लिए नए पर्दे, पखवाई तैयार किए जाते हैं। 17 सितंबर से लगभग सभी रामलीलाएं प्रारंभ हो जाएंगी। कई स्थानों पर मंच निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है।
हरिद्वार नगर की रामलीला बहुत प्रचलित रही हैं। कई बार यहां के कलाकारों को अन्य प्रदेशों की लीलाओं में मंचन के लिए बुलाया गया है। सबसे पुरानी रामलीला कनखल की है और उसके बाद राम नाटक के तौर ज्वालापुर में रामलीला शुरू हुई। मुख्य हरिद्वार की रामलीला सबसे बाद में शुरू हुई। अब दर्जनों स्थानों पर लीला मंचन किया जा रहा है। पंचपुरी की रामलीलाओं को यह श्रेय प्राप्त है कि यहां मास्टर संत सिंह जैसे कलाकारों ने मुंबई रंगमंच से आकर मंचन किया। पंजाब के अनेक जाने-माने कलाकार यहां अभिनय करते रहे। इन दिनों रामलीला मंचन के साथ-साथ मंच सजावट का काम पर्दे के पीछे चल रहा है। पहले श्राद्ध से रामलीला की रिहर्सल प्रत्येक वर्ष प्रारंभ होती है। इन दिनों रिहर्सल जोर-शोर से आधी रात तक चल रही है। चूंकि पंचपुरी की रामलीला अपने स्थानीय गायन के लिए भी जानी जाती है। अत: संगीतकार गीत तैयार कराने में भी जुटे हुए हैं। पंचपुरी के कई कवि रामलीला के नए गीत भी लिखते आए है। प्रसिद्ध गीता पंडित परसराम चक्रपाणि द्वारा रचित अधिकांश गीत अभी भी रामलीलाओं में गाए जाते हैं। रिहर्सल के दौरान भी पंडित जी द्वारा लिखे गए गीतों को कंठस्थ कराया जाता है। पंचपुरी की रामलीलाओं की यह विशेषता हो गई है कि अनेक स्थानीय कलाकर मंचन के लिए स्वयं को उपलब्ध कराते हैं। यह कलाकार बिना कोई शुल्क लिए स्वेच्छा से मंचन करते हैं।
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हरिद्वार में नहीं समीपवर्ती देहातों में रामलीलाओं की तैयारी लगातार चल रही है। बहादराबाद की रामलीला भी 100 वर्ष पार कर चुकी है। इसी प्रकार निकटवर्ती अनेक गांव में रामलीला मंचन की तैयारी चल रही है। यहां यह बात याद दिलाना जरूरी है कि पंचपुरी की सबसे पुरानी रामलीला सबसे पहले निकटवर्ती जगजीतपुर गांव में प्रारंभ हुई थी। बाद में इस रामलीला को वहां से कनखल ले जाया गया।
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