श्रीनगर। एमसीआई (भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद) से राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर को छह विषयों में पीजी मान्यता नहीं मिल पाई है। एमसीआई ने कॉलेज के प्राचार्य के दो-दो जगह काम करने और फैकल्टी की कमी सहित अन्य आपत्तियां लगाते हुए 25 सितंबर से पूर्व निस्तारण के निर्देश दिए हैं। एमसीआई ने संस्थान की कमियों पर दूसरी बार आपत्तियां लगाई हैं। शासन की ओर से इनको दूर न किए जाने की वजह से संस्थान पीजी मान्यता मिलने से रह गया।
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज ने 14 विभागों में पीजी (एमडी/एमएस) के लिए आवेदन किया हुआ है। 16-17 मई को एमसीआई की तीन सदस्यीय टीम ने मेडिकल कॉलेज का दौरा कर प्री-पीजी एसेसमेंट करते हुए फैकल्टी और संसाधनों को परखा था। एमसीआई ने कॉलेज में काफी कमियां पाते हुए 25 मई को रिपोर्ट कॉलेज प्रशासन को भेजकर इन्हें दूर करने को कहा था, लेकिन एक भी कमी दूर नहीं हुई।
इसके बावजूद एमसीआई की 6 सदस्यीय टीम 3 अगस्त को अचानक छह विषयों का पीजी निरीक्षण करने पहुंच गई। इस बार भी कमियां नहीं सुधरी थीं। एमसीआई ने कॉलेज के प्राचार्य को पत्र भेज कर 25 सितंबर से पूर्व कमियों को दूर करने के लिए कहा है। ताकि पुन: पीजी मान्यता के लिए निरीक्षण किया जा सके।
फार्माकोलॉजी विभाग में भी लगा झटका
श्रीनगर। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग में पीजी मान्यता मिलने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन इसमें भी झटका लगा है। 3 अगस्त को निरीक्षण के दिन विभाग के एचओडी परीक्षा लेने के बाद अवकाश पर थे। इस वजह से एमसीआई ने निरीक्षण में उनके पद को रिक्त माना है।
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चिकित्सा शिक्षा निदेशालय और शासन को एमसीआई की आपत्तियों के संबंध में अवगत कराते हुए फैकल्टी और नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति की मांग की गई है। साथ ही एमसीआई के मानकों के तहत एक ही संस्थान में कार्य करने का अनुरोध किया है। -प्रो. सीएम रावत, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर