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उपचार के दौरान मरीज की मौत, परिजनों ने जमकर काटा हंगमा

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इलाज के दौरान मरीज की मौत पर हंगामा
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-- 20 अगस्त को स्कूटी रपटने से घायल हुआ था अरुण
-- 6 अगस्त को अपने पैरों से अस्पताल गया लेकिन वापिस नहीं आया
-- परिजनों ने आईडीपीएल पुलिस को दी तहरीर

अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
एम्स में उपचार के दौरान शुक्रवार सुबह एक युवक की मौत हो गई, जिस पर मृतक के परिजनों ने जमकर हंगामा काटा। इस दौरान परिजनों ने डॉक्टर पर उपचार के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए एम्स प्रशासन से दोषी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिजनों की ओर से इस बाबत आईडीपीएल पुलिस चौकी में तहरीर दी गई है। मृतक के पिता जगदीश लाल गौड़ ने बताया कि बीते महीने 20 अगस्त को अरुण गौड़ (38) की स्कूटी रपटने से पैर में हल्की चोट आ गई थी, जिसके बाद से अरुण का एम्स में उपचार चल रहा था।
बीती छह सितंबर को अरुण घर से अकेले अपने दुपहिया वाहन से एम्स में ड्रेसिंग कराने के लिए आया था। मरहम पट्टी के बाद डॉक्टरों ने उसे इंजेक्शन लगाया, जिससे उसे एम्स परिसर में ही उल्टियां होनी शुरू हो गई। एम्स प्रशासन द्वारा उनके पुत्र अरुण गौड़ को आनन-फानन में इमरजेंसी में भर्ती करवाया, और परिजनों को फोन कर घटना की जानकारी दी। बताया कि जब तक वह अस्पताल पहुंचे तो इस बीच अरुण की हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर रखा। इसके बाद से उसका उपचार चल रहा था, शुक्रवार सुबह उपचार के दौरान उनके पुत्र की मौत हो गई।
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मृतक की बहन वंदना ने आरोप लगाया कि अरुण की हालत बिगड़ने के बाद परिजनों ने एम्स चिकित्सकों से उसे अन्य अस्पताल के लिए रेफर करने को कहा था। लेकिन डॉक्टरों ने हालत नाजुक होने की बात कहकर रेफर करने से इनकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाज कर रहे डॉक्टर ने अरुण को गलत इंजेक्शन दिया, जिससे उसके भाई की मौत हो गई। परिजनों ने एम्स प्रशासन से दोषी डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही परिजनों ने आईडीपीएल पुलिस चौकी में दोषियों के खिलाफ तहरीर दी है। हालांकि पुलिस ने अब तक मामले में मुकदमा दर्ज नहीं किया है।
आठ साल की बच्ची छोड़ गया अरुण
एम्स में इलाज के दौरान अरुण की मौत के बाद परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उन्होंने बताया कि अरुण की आठ साल की बच्ची है। वह शिवाजीनगर में परचून की दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता था। अरुण का भाई संजय कुमार रेलवे में नौकरी करते हैं। मृतक की बहन वंदना ने एम्स प्रशासन से अरुण की पत्नी मंजू देवी को संस्थान में नौकरी देने की मांग की है।
मीडिया कर्मियों के साथ की बदसलूकी
एम्स में रोगी की उपचार के दौरान मौत के बाद अस्पताल में हंगामा काट रहे परिजनों से बातचीत व कवरेज के दौरान मौके पर मौजूद इलेक्ट्रानिक व प्रिंट मीडिया कर्मियों के साथ एम्स प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने बदसलूकी का प्रयास किया। उन्होंने मीडिया कर्मियों से कैमरे जबरन बंद करने को कहा।
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इनकी सुनिए
एम्स की ओर से अरुण गौड़ को जो भी ट्रीटमेंट दिया गया था, उसकी जानकारी परिजनों को दी गई थी। उपचार के दौरान रोगी की मृत्यु होने पर परिजनों को व के साथ डेथ सर्टिफिकेट सौंपा गया। डेथ सर्टिफिकेट लेने से परिजनों ने इनकार कर दिया और उपचार की संपूर्ण फाइल रिपोर्ट की मांग की। जिसके बाद उन्हें करीब 100 पृष्ठ की ट्रीटमेंट रिपोर्ट सौंप दी गई है। एम्स प्रशासन की ओर से मामले की जांच चल रही है। परिजनों को भी इस मामले में कार्रवाई का स्वतंत्र अधिकार है।
-- हरीश थपलियाल, पीआरओ एम्स।
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