अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
वर्षों बाद इस बार पूरे नौ नवरात्र पड़ रहे हैं। विजय दशमी का पर्व नवरात्र के दसवें दिन धूमधाम से मनाया जाएगा। कई वर्षों से नवरात्र में घटत- बढ़त होती आई है। इस बार प्रत्येक नवरात्र अपने दिन पड़ेगा और उस दिन की भगवती की पूजा पूरे दिन होगी।
नवरात्र का शुभारंभ 21 सितंबर को जाएगा और 29 सितंबर को समापन होगा। इस महीने के आखिरी दिन 30 सितंबर को सरस्वती विसर्जन, अपराजिता पूजन, और विजय दशमी के पर्व एक साथ मनाए जाएंगे। श्राद्धों के दिनों में ही रामलीलाओं का शुभारंभ हो रहा है। अनेक रामलीलाएं 17 सितंबर को श्राद्धों के दौरान शुरू हो जाएगी। रामलीला कमेटियों ने इस बार मंचन की विशेष व्यस्थाएं की है। पितृ अमावस्या को लेकर यद्यपि मतभेद बने हुए हैं। कुछ पंचांगों में सर्वपित्रश्राद्ध विसर्जन 19 को तथा अन्य में 20 को दिया गया है। अधिकांश पंचांग 20 सितंबर को ही पित्र विसर्जन की शुद्ध तिथि मान रहे हैं। इसी दिन नाना- नानी का श्राद्ध करने की परंपरा है। शारदीय नवरात्र के दौरान अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना की जाएगी। सभी देवियों के दिन सामान्य रूप से नौ रहते है किंतु पिछले कुछ वर्षों से नवरात्र के दिन घटते रहे हैं। किसी न किसी एक दिन दो नवरात्र पड़ जाते है। इस वर्ष प्रथम पूजा से लेकर महानवमी की पूजा तक किसी दिन भी विराम नहीं मिलेगा।
नवरात्र के पाठ और कलश स्थापना 21 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त में की जाएगी। कलश स्थापन के लिए प्रात:काल का समय सर्वदा उपयुक्त है। कलश पूजन हस्त नक्षत्र में होगा। नवरात्र का समापन पूषा नक्षत्र में हो रहा है जबकि विजय दशमी का पर्व उत्तर षाढ़ा नक्षत्र में पड़ रहा है। महानवमी और भद्रकाली की पूजा 29 सितंबर को की जाएगी।