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आयुर्वेद में अनेक असाध्य रोगों का इलाज संभव

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में संस्कृत महोत्सव के दूसरे दिन आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में लगभग 30 शोधपत्रों का वाचन किया गया। इस मौके पर कहा गया कि आयुर्वेद में अनेक असाध्य रोगों का इलाज संभव है।
उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय ऋषिकुल परिसर के निदेशक प्रो. सुनील कुमार जोशी ने कहा कि आयुर्वेदिक ग्रंथों में स्वस्थ जीवन के उपायों का विस्तृत वर्णन है। इन उपायों से मनुष्य स्वस्थ रह सकता है। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डा. राजेंद्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि हमारी प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद रही है। इसका आश्रय लेकर अनेक असाध्य रोगों से निवृत्ति पा सकते है। उत्तराखंड पतंजलि विश्वविद्यालय के डा. विजयपाल प्रचेता ने कहा कि आयुर्वेद के सिद्धांतों का पालन वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में करना चाहिए। आयुर्वेद को आज संपूर्ण विश्व मान चुका है। दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सोहनपाल सिंह आर्य ने कहा कि आयुर्वेद की ज्यादातर जड़ी बुटियों के नाम संस्कृत में मिलते हैं। इसलिए आयुर्वेद की जानकारी के लिए संस्कृत वाङ्मय को सीखना जरूरी है। संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. ब्रह्मदेव विद्यालंकार एवं प्रो. सोमदेव शतांशु ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संयोजन विभाग के डा. मौहर सिंह मीणा ने किया।
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इस अवसर पर कन्या गुरुकुल परिसर की समन्वयक प्रो. संगीता, डा. वीना विश्नोई, प्रो. राकेश शर्मा, प्रो. रूपकिशोर शास्त्री, प्रो. मनुदेव बंधु, डा. सत्यपति, डा. बबलू वेदालंकार, डा. विपिन बालियान, डा. प्रकाश पंत, डा. शैलेश तिवारी, डा. अरुण मिश्र, संतोष पंत, पवन कुमार, गौतम, प्रभुशरण, सुनील कुमार, डा. संदीप वेदालंकार, प्रकृति, उपासना, किरण, नुपूर, सोनम इत्यादि उपस्थित रहे।
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