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कान्यकुब्ज भुर्जी वैश्य समाज ने लिया संगठित होकर कार्य करने का संकल्प

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
भूपतवाला स्थित कान्य कुब्ज भुर्जी वैश्य धर्मशाला में कान्य कुब्ज समाज की अखिल भारतीय महासभा की बैठक में समाज के लोगों से संगठित होकर कार्य करने का आह्वान किया गया।
समाज के अध्यक्ष गोपाल चंद शाह ने कहा कि राजनैतिक क्षेत्र में हमारी भागीदारी शून्य है जिसका कारण समाज में हमारा बिखराव और अपनी विशिष्ट पहचान न होना है। महासभा के संरक्षक छेदीलाल गुप्ता ने कान्य कुब्ज भुर्जी वैश्य समाज के द्वारा हरिद्वार, चित्रकुट, वाराणसी, इलाहाबाद शहरों में धर्मशालाओं के निर्माण पर प्रसन्नता प्रकट करते हुए कहा कि समाज सेवा के क्षेत्र में हमें अपना योगदान सुनिश्चित करना चाहिए। महासभा के महामंत्री राजेंद्र कुमार गुप्ता, कोषाध्यक्ष प्रभात चंद शाह ने वर्ष भर का लेखा जोखा प्रस्तुत किया। उत्तराखंड भुर्जी वैश्य समाज के अध्यक्ष चौखेलाल ने भूपतवाला में निर्मित धर्मशाला में दिए गए दान और सहयोग के लिए भी आभार प्रकट किया। हरिद्वार में निवास करने वाले भुर्जी वैश्य समाज की ओर से सदानंद, संदीप कुमार, सन्नी सक्सेना, सुमित चंद्रा ने महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, संरक्षक इत्यादि को प्रतीक चिह्न देकर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर नीरज कुमार, अनिल कुमार, तथा स्थानीय भुर्जी समाज के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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भारत नेपाल एकता तीर्थ यात्रा का समापन
लालमाता मंदिर से अगस्त माह में शुरू हुई थी,काठमांडू में समापन
हरिद्वार। भारत नेपाल एकता को मजबूत करने के लिए हरिद्वार के लालमाता वैष्णों देवी मंदिर से प्रारम्भ हुई एकता यात्रा का समापन काठमांडू में भगवान पशुपतिनाथ के अभिषेक के साथ हुआ इस अवसर पर नेपाल के पूर्व प्रधान मंत्री लोकेंद्र बहादुर चंद और पूर्व प्रधान न्यायधीश खिलराज रेग्मी उपस्थित रहे। उक्त जानकारी राष्ट्रीय एकता अभियान के महामंत्री पद्मराज जोशी एवं भारत नेपाल एकता तीर्थयात्रा के सूत्रधार चक्रदेव जोशी ने दी। तीर्थयात्रियों का स्वागत करने नेपाल के कार्यवाहक राजदूत स्वयं हरिद्वार पहुंचे थे। नेपाल के 75 शहरों का भ्रमण कर एकता यात्रा का समापन नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में भगवान शिव के जलाभिषेक से हुआ। भगवान शिव का गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी, ब्रहमपुत्र, आदि नदियों के जल से अभिषेक करने के पश्चात भारत नेपाल की सुख समृद्धि और शांति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की गई।
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