बदरीनाथ। बामन द्वादशी पर्व पर भगवान बदरीनाथ हजारों भक्तों के साथ अपनी माता मूर्ति से मिलने माणा गांव पहुंचे। इस दौरान स्थानीय श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों ने कीर्तन-भजन कर बदरीनाथ की स्तुति की। इस दौरान बदरीनाथ धाम के कपाट करीब छह घंटे तक बंद रहे। माता मूर्ति से मिलने के बाद अपराह्न तीन बजे बदरीनाथ भगवान अपने मंदिर में विराजमान हुए। शाम चार बजे बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद माणा गांव में माता मूर्ति मेला भी संपन्न हो गया। माता मूर्ति मंदिर में भगवान उद्धव, घंटाकरण (क्षेत्रपाल) और माता मूर्ति ने अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया।
रविवार को बदरीनाथ धाम में बाल भोग लगने के बाद सुबह नौ बजे बदरीश पंचायत (बदरीनाथ गर्भगृह) से भगवान बदरीनाथ के प्रतिनिधि के रुप में उद्धव जी की उत्सव डोली ने हजारों भक्तों के साथ माणा गांव स्थित माता मूर्ति मंदिर के लिए प्रस्थान किया। बदरीनाथ धाम से माता मूर्ति मंदिर की दूरी करीब तीन किलोमीटर है। बदरीनाथ से रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी, बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, डिमरी पंचायत के अध्यक्ष सुरेश डिमरी, कांता डिमरी, राकेश डिमरी, ज्योतिष डिमरी, प्रशांत डिमरी और माता मूर्ति के पुजारी सहित करीब दो हजार तीर्थयात्रियों व स्थानीय लोगों ने उद्धव जी की डोली के साथ माता मूर्ति मंदिर के लिए प्रस्थान किया।
माता मूर्ति मंदिर में बदरीनाथ के रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने पूजा-अर्चना संपन्न की। बदरीनाथ धाम में दोपहर में लगने वाला भोग भी माता मूर्ति मंदिर में लगाया गया। दिनभर भगवान बदरीनाथ की पूजा-अर्चना माता मूर्ति के साथ हुई। भोटिया जनजाति की महिलाओं ने हरियाली अर्पित कर भगवान बदरीनाथ और माता मूर्ति के मांगल गीत गाए। तीर्थयात्रियों व स्थानीय लोगों ने कीर्तन-भजन का आयोजन किया। शाम चार बजे उद्धव जी बदरीनाथ मंदिर में विराजमान हुए। माणा गांव में माता मूर्ति मेले के दौरान गढ़वाल स्काउट, सद्गुरु धाम आश्रम बदरीनाथ और माणा गांव के ग्रामीणों की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया।