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आपसी संघर्ष में ‘राजा’ की मौत’

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज में हाथियों के आपसी संघर्ष में पालतू हाथी की मौत हो गई है। पार्क के अधिकारियों की मौजूदगी में पालतू हाथी का पोस्टमार्टम कराने के बाद वीडियोग्राफी कर हाथी के शव को दफनाया गया।
जानकारी के अनुसार रिजर्व की चीला रेंज में शनिवार तड़के तीन बजे जंगल से भटककर एक जंगली हाथी पालतू हाथियों के बाड़े में पहुंच गया। यहां पहुंचते ही जंगली हाथी ने सबसे पहले टीनशेड तोड़ दिया। इसके बाद उसने पालतू हाथी राजा के बाड़े में घुसकर उस पर हमला कर दिया। राजा जंजीर से बंधा होने से जंगली हाथी का मुकाबला नहीं कर सका। पास ही बंधी पालतू हथनी राधा और रंगीली ने जोर जोर से चिल्लाना शुरू किया तो चीला रेंज के रेंजर अनिल कुमार पैन्यूली और वनकर्मी मौके पर पहुंचे। उन्होंने जंगली हाथी को जंगल में दौड़ा दिया, लेकिन तब तक राजा हाथी के हमले में घायल हो चुका था। हमले से राजा के पैर, सिर और शरीर पर कई जगह घाव हो गए थे। पार्क के अधिकारियों ने डाक्टर को इसकी जानकारी दी और हाथी के घाव में दवाई लगाई। इलाज के दौरान हाथी की मौत हो गई। इसकी जानकारी मिलते ही राजाजी पार्क के डायरेक्टर सनातन सोनकर, वाइल्ड लाइफ वार्डन अजय शर्मा, डा. अदिति शर्मा व डा. प्रसून दुबे मौके पर पहुंचे। वीडियोग्राफी के बाद हाथी के शव का पोस्टमार्टम किया गया और पास में ही स्थित खाली जगह में हाथी के शव को दफनाया गया। डायरेक्टर सनातन सोनकर ने बताया कि हमले में पालतू हाथी राजा को पीछे से पैर में हमला किया है। जिसके कारण चोट लगने से हाथी की मौत हो गई है।
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हाथी राजा की भी बनेगी चीला में समाधि
27 साल तक चीला का दुलारा बना रहा राजा
अरुंधति ने अपने बच्चे की तरह राजा को किया था प्यार
सागर जोशी
हरिद्वार।
अरुंधति (हथिनी)के बाद अब राजा की भी चिल्ला में समाधि बनेगी। जिस कदर लोग अरुंधति को चाहते थे, वैसे लोग राजा को भी प्यार भरी आंखों से देखते थे। खास बात यह है कि राजा को अरुंधति ने अपने बेटे की तरह पाला और बड़ा किया था।
वर्ष 1992 में हुई मोतीचूर रेंज में रेल दुर्घटना के एक हथिनी की मौत हो गई। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो पास में पांच माह का हाथी का एक बच्चा मिला जो अपनी मां के शव के पास आंसू बहा रहा था। पांच माह के हथिनी के बच्चे को तत्कालीन राजाजी नेशनल पार्क के अधिकारी चीला रेंज लेकर आ गए। जहां इसका नाम राजा रखा गया।
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चीला की सैर सवारी करने और सैलानियों को प्यार करने के लिए मशहूर हथिनी अरुंधति ने अपने बच्चे की तरह राजा को प्यार दिया था। मात्र पांच माह का बच्चा राजा चीला में पहुंचा था। मां की मौत के बाद कई दिनों तक राजा की तबियत खराब रही। वन विभाग के अधिकारियों ने राजा के बचने की आस छोड़ दी थी। उस समय अरुंधति ने राजा को अपने बच्चे की तरह प्यार किया और देखभाल की। इस बीच 2 अक्तूबर वर्ष 2007 को अरुंधति की मौत हो गई थी। तब राजा ने कई दिनों तक सबको परेशान करके रखा। मां की तलाश में राजा इधर-उधर भागता था। अरुंधति की मौत के बाद प्रशासन ने पार्क में उसकी समाधि बनवाई थी। जहां हर वर्ष कार्यक्रम होते और अरुंधति को पुष्पांजलि दी जाती है। अब शनिवार टस्कर से संघर्ष के बाद राजा की मौत हो गई तो कई महावत वहां पहुंचे और अपने आंख से आंसू नहीं रोक पाए। राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के डायरेक्टर सनातन सोनकर ने बताया कि अरुंधति के बाद राजा की भी समाधि बनाई जाएगी और उसके जीवन के बारे में भी लिखा जाएगा, ताकि लोग राजा के बारे में जान सके।
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