गोपेश्वर। केदारनाथ की तीर्थयात्रा और गांव-गांव का भ्रमण करने के बाद शुक्रवार को भक्तों से विदा लेकर टेड़ा-खंसाल की आराध्य देवी मां इंद्रामति की डोली अपने मूल मंदिर (इंद्रामति मंदिर) में विराजमान हो गई है। अपनी आराध्य से विदा लेते हुए भक्तों की आंखें नम हो गईं। भक्तों ने मां इंद्रामति से परिवार की कुशलता की कामना की।
मां इंद्रामति की डोली 26 अगस्त को बछेर क्षेत्र में पहुंची थी। शुक्रवार को मां इंद्रामति की डोली सुबह नौ बजे टेड़ा-खंसाल गांव स्थित अपने मूल मंदिर (इंद्रामति मंदिर) प्रांगण में पहुंची। मां ने पश्वा पर अवतरित होकर भक्तों को दर्शन दिए। शाम चार बजे मां ने सभी भक्तों को आशीर्वाद दिया और अपने मूल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया। देवी भक्तों ने दोबारा मां की दिवारा यात्रा के आयोजन का संकल्प लिया। जिला पंचायत सदस्य ऊषा रावत ने ग्रामीणों को मंदिर प्रांगण के सुंदरीकरण और व्यास पीठ के निर्माण के लिए जिला पंचायत से वित्तीय मदद का आश्वासन दिया है। इस मौके पर पुजारी दुर्गा प्रसाद मैठाणी, मंदिर समिति के अध्यक्ष दर्शन सिंह, कृपाल सिंह, यदुवीर सिंह, हरि सिंह और शेर सिंह आदि मौजूद थे। वहीं, घुड़साल गांव की मां इंद्रामति की डोली शनिवार को अपने मंदिर में विराजमान होगी।
ग्वालदम पहुंची नंदा लोकजात
देवाल। नंदा लोकजात शुक्रवार देर शाम ग्वालदम पहुंची। यहां ग्रामीणों ने नंदा की डोली और यात्रा का भव्य स्वागत किया। शनिवार को विभिन्न गांवों का भ्रमण करने के बाद यात्रा रात्रि प्रवास के लिए जौला गांव पहुंचेगी।
शुक्रवार को पूर्णा गांव में पूजा के बाद ललित मिश्रा, भुवन चंद्र, भैरव दत्त मिश्रा, हरीश चंद्र, गोविंद पांगती, उमेश मिश्रा, लक्ष्मण राम, किशन कुमार, द्वारिका प्रसाद, विपिन चंद्र कोठारी आदि ने नंदा लोकजात यात्रा को चिड़िंगा के लिए विदा किया। चिड़िंगा के ग्रामीणों ने देर शाम नंदा की डोली को ग्वालदम पहुंचाया। श्रद्धालुओं ने देवी की पूजा की और भोग लगाया। ग्वालदम पहुंचने पर लोगों ने यात्रा का भव्य स्वागत किया।