फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एम्स संस्थान में एमबीबीएस छात्रों का फूटा गुस्सा

विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो :------------
विज्ञापन


एमबीबीएस छात्रों ने निदेशक आवास के बाहर दिया धरना
-- एम्स निदेशक पर कैंपस में घूमने पर रोक और कपड़ों पर पाबंदी लगाने का लगाया आरोप

अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की ऋषिकेश शाखा में विभिन्न मांगों को लेकर एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं ने निदेशक आवास के बाहर बीते बुधवार रात से बृहस्पतिवार दोपहर तक घंटों धरना दिया और प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने निदेशक पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया। गतिरोध के चलते एम्स प्रशासन द्वारा धरनास्थल पर बुलाई गई पुलिस और छात्रों के बीच धक्कामुक्की भी हुई। दोपहर बाद दोनों पक्षों के बीच हुई वार्ता में मामला सुलझा लिया गया। जिसके बाद गतिरोध समाप्त हो गया।
एम्स ऋषिकेश में बीते बुधवार की देर रात एबीबीएस के करीब डेढ़ सौ छात्र-छात्राएं संस्थान कैंपस स्थित निदेशक आवास के बाहर जमा हो गए। उन्होंने बारिश के दौरान आवास के बाहर धरना दिया और एम्स प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। वह एम्स निदेशक से विभिन्न बिंदुओं पर वार्ता की मांग कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने निदेशक पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया, कहा कि उन्हें कैंपस में घूमने नहीं दिया जा रहा है। मन मुताबिक कपड़े पहनने को लेकर भी पाबंदियां लगाई जा रही हैं।
विज्ञापन

आरोप है कि हॉस्टल की बिजली बार-बार बाधित कर दी जाती है। साथ ही उन्होंने अभिभावकों से विजिटर रूम का शुल्क वसूलने का आरोप भी लगाया। इस दौरान उन्होंने संस्थान पर निम्न स्तर की चिकित्सा, शिक्षा, क्षेत्रवाद बरतने आदि कई गंभीर आरोप भी जड़े। बृहस्पतिवार सुबह तक डॉयरेक्टर आवास के बाहर धरनारत छात्रा-छात्राओं को पुलिस बल बुलाकर हटाने की कोशिश की गई। मगर, आंदोलित एमबीबीएम स्टूडेंट बिना एम्स प्रशासन से वार्ता के मौके से हटने पर अड़ गए। इसके बाद दोपहर में एम्स प्रशासन छात्र-छात्राओं की लंबित मांगों को लेकर वार्ता के लिए तैयार हुआ।

निदेशक व छात्रों में हुई वार्ता के बाद बनी सहमति
एम्स में अध्ययनरत एमबीबीएस छात्रा-छात्राओं की शिकायतों व समस्याओं के बाबत दोपहर करीब 12 बजे निदेशक प्रोफेसर डा. रविकांत ने उनसे वार्ता की। इस दौरान स्टूडेंट्स की सभी समस्याओं को सुना और उनका निस्तारण किया गया। एम्स प्रशासन ने कहा कि रात 10 बजे के बाद किसी को भी कैंपस में घूमने की अनुमति नहीं दी जा सकती। आईपीडी और ओपीडी में स्टूडेंट्स एम्स के नियमों के तहत ही ड्रेस पहनेंगे। एम्स प्रशासन का कहना है कि हॉस्टल की बिजली ऊर्जा निगम की लाइन में फॉल्ट की वजह से बाधित होती है। एम्स प्रशासन ने क्लासेज 8 नहीं, 9 बजे से संचालित करने की बात कही है। उधर, एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल ने बताया कि एम्स में अध्ययनरत एमबीबीएस के छात्रों द्वारा पढ़ाई, खेलकूद व हॉस्टल से संबंधित विभिन्न मांगों को लेकर गतिरोध पैदा किया था। बताया कि एम्स निदेशक प्रो. रविकांत की मौजूदगी में मेडिकल कॉलेज के लेक्चर हाल में छात्रों के साथ हुई विस्तृत वार्ता में सभी प्रकरणों का निस्तारण के बाद गतिरोध समाप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि करीब दो घंटे चली वार्ता में छात्रों की मेडिकल एजूकेशन से संबंधित अनावश्यक मांगों को ख़ारिज कर दिया गया। जबकि पढ़ाई, खेलकूद व मनोरंजन से संबंधित जायज मांगों पर आवश्यक कार्रवाई की बात कही गई। साथ ही प्राध्यापकों को इसके लिए सख्त निर्देश जारी किए गए। साथ ही हॉस्टल में बिजली, पानी की समस्याओं के निपटारे के लिए संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए गए हैं।
विज्ञापन


पुलिस पर बल प्रयोग करने का आरोप
एम्स कैंपस में निदेशक के आवास के बाहर डटे एमबीबीएस छात्र-छात्राओं ने पुलिस पर बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को गलत ठहराया, कहा कि पुलिसकर्मी लाठियों के साथ कैंपस में दाखिल हुए और धरना दे रहे स्टूडेंट्स को डराने की कोशिश की। जबकि वह जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्वक ढंग से धरने पर बैठे थे। उधर, एम्स के पीआरओ हरीश थपलियाल का कहना था कि डायरेक्टर के पास दिल्ली से लेक्चर के लिए प्रोफेसर आए थे। मगर उन्हें छात्र-छात्राओं द्वारा आवास से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा था, लिहाजा व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस ने उन्हें हटाया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें