गोपेश्वर। बदरीनाथ हाईवे जल्द ही रुद्रप्रयाग से जोशीमठ 116 किलोमीटर तक एनएच (राष्ट्रीय राजमार्ग) को हस्तांतरित हो जाएगा। अभी तक हाईवे का जिम्मा बीआरओ संभाल रहा था। बीआरओ के पास सिर्फ चीन सीमा क्षेत्र को जोड़ने वाली जोशीमठ-माणा और जोशीमठ-मलारी हाईवे के रख-रखाव का जिम्मा रहेगा। सड़क परिवहन और रक्षा मंत्रालय की ओर से यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। अब केंद्र सरकार से प्रस्ताव के मंजूरी का इंतजार है।
बदरीनाथ हाईवे जोशीमठ से आगे नीती व माणा घाटी में चीन सीमा को जोड़ता है। अभी तक ऋषिकेश से माणा तक (299.06 किमी) बदरीनाथ हाईवे का रख-रखाव बीआरओ के पास था। एक अप्रैल वर्ष 2015 को राज्य सरकार की पहल पर केंद्र सरकार ने ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग (141 किमी) तक हाईवे को बीआरओ से हटाकर एनएन को सौंप दिया। अब रुद्रप्रयाग से जोशीमठ तक बदरीनाथ हाईवे का जिम्मा एनएच को सौंपने की तैयारी की जा रही है। वहीं लोनिवि (एनएच) के ईई प्रवीण कुमार का कहना है कि सड़क परिवहन मंत्रालय व रक्षा मंत्रालय की ओर से हाईवे को एनएच को सौंपने का प्रस्ताव तैयार किया गया। दोनों मंत्रालयों की मंजूरी के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए गया है।
बेरोजगार हो जाएंगे एक हजार मजदूर
गोपेश्वर। रुद्रप्रयाग से माणा तक बदरीनाथ हाईवे के चौड़ीकरण कार्य में करीब एक हजार मजदूर जुटे हैं। इनमें से करीब 400 मजदूर उत्तराखंड के हैं। पीपलकोटी के महेश सिंह, हरेंद्र सिंह, महिपाल और कल्याण सिंह का कहना है कि वे 2007 से बीआरओ के साथ काम कर रहे हैं। हाईवे के एनएच को हस्तांतरित होने पर एनएच उन्हें बाहर कर दूसरे मजदूरों को काम सौंप देगा।
बजट के अभाव में डामरीकरण रुका
गोपेश्वर। बीआरओ की ओर से चमोली से पीपलकोटी के मध्य हाईवे का चौड़ीकरण कार्य पूरा कर लिया गया है, लेकिन बजट के अभाव में यहां डामरीकरण कार्य नहीं हो पाया है। यहां करीब बीस किलोमीटर तक हाईवे का डामरीकरण होना बाकी है। बीआरओ के कमान अधिकारी पीसी सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार से बजट न मिलने के कारण डामरीकरण कार्य रुक गया है।