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अब हर कोई नहीं बनेगा अखाड़ों का महामंडलेश्वर

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कौशल सिखौला
हरिद्वार।
गुरमीत राम रहीम कांड ने एक बार फिर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद को विचलित कर दिया है। परिषद ने निर्णय लिया है कि अब हर कोई अखाड़ों का महामंडलेश्वर नहीं बन पाएगा। फर्जी संतों के बारे में परिषद स्तर से राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी सूचना दी जाएगी।
अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने बताया कि फर्जी संतों के कारण संत जगत बहुत बदनाम हुआ है, हालांकि इन फर्जी कथित बाबाओं का अखाड़ों अथवा साधु समाज से कोई लेना देना नहीं है। ऐसे बदनाम लोग स्वयं को संत कहने लगते हैं और भक्तों से बाबा-बाबा कहकर संबोधित कराते हैं। कहा कि अतीत में कुछ अखाड़ों ने ऐसे फर्जी बाबाओं को महामंडलेश्वर बनाया है। अब अखाड़ा परिषद यह निर्णय कर रही है कि किसी भी सूरत में कोई बदनाम भगवाधारी अखाड़ों का महामंडलेश्वर अथवा महंत न बन पाए। जो भी व्यक्ति खुद को संत बताते हुए महामंडलेश्वर बनना चाहेगा, उसका साक्षात्कार अखाड़ों के आचार्यों के साथ अखाड़ों की कार्यकारिणी भी लेगी। कथित संतों का कारोबार जानने के लिए अखाड़ा परिषद के प्रतिनिधि उनके स्थानों पर जाकर जांच करेंगे। ऐसे अधिकांश व्यक्ति फर्जी रूप से आश्रम बनाकर रहते हैं, जो उनका अधिकार क्षेत्र नहीं है। अखाड़ा परिषद इस बारे में अब बहुत सख्ती से काम करने वाली है। श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने बताया कि आसाराम, रामपाल, राम रहीम आदि का संतजगत से कभी भी कोई लेना देना नहीं रहा है। उनके कारनामों से बदनामी अखाड़ों की होती है। अखाड़ों में संन्यास, वैराग्य, निर्मल, उदासीन आदि संप्रदाय आते हैं। संन्यासियों के सात और बैरागियों के तीन अखाड़े हैं। उदासियों के दो और निर्मलों का एक अखाड़ा है। बदनाम संतों का किसी भी अखाड़े से कोई लेना देना नहीं है।
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श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि संतों के क्षेत्र में भारत साधु समाज आदि अनेक इकाई कार्य कर रही हैं। सर्वोच्च संस्था अखाड़ा परिषद को माना जाता है। अब भविष्य में किसी भी संत को यह अधिकार नहीं मिलेगा कि वह संत परंपरा को बदनाम करे। इसके लिए फर्जी कथित संतों के बारे में राज्यों के मुख्यमंत्रियों को अवगत कराया जाएगा।

पचास वर्षों से फर्जी बाबाओं का मायावी संसार
चार कुंभ, दो अर्द्धकुंभ बीते, नहीं बन पाई सूची
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
जब चार के बजाय शंकराचार्य और जगद्गुरु ही दो दर्जन हो जाएं तब फर्जी बाबाओं की भला क्या गिनती। भगवा को कलंकित करने का सिलसिला पचास वर्षों में पनपा, फला- फूला और एक मायावी संसार खड़ा हो गया। संतों के दर्जन भर संगठन बार-बार ठगे रह गए और अखाड़ों से भी फर्जियों को सहारा मिलता रहा। चार कुंभ और दो अर्द्धकुंभ बीतने के बावजूद फर्जी बाबाओं की सूची अखाड़ा परिषद तैयार नहीं कर पाई।
प्रयाग में वर्ष 2007 के अर्द्धकुंभ में अखाड़ा परिषद ने निर्णय लिया था कि संत समाज को भगवा की आड़ में बदनाम करने वाली संतई को बेनकाब किया जाएगा। बाद में वर्ष 2010 के हरिद्वार कुंभ में परिषद ने बकायदा इस आशय का पहला प्रस्ताव में पारित किया। वर्ष 2013 में प्रयाग कुंभ, वर्ष 2015 में नासिक कुंभ, वर्ष 2016 में उज्जैन कुंभ और हरिद्वार अर्द्धकुंभ में ये प्रस्ताव बार- बार पारित हुए। अखाड़ा परिषद ने कईं कमेटियां बनाई। भारत साधु समाज, षड़दर्शन साधु समाज, संत समिति, आश्रम परिषद आदि संगठनों ने फर्जी बाबाओं की सूची जारी करने पर बल दिया। हाल ही में अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने इसी हरिद्वार में फर्जी शंकराचार्य की सूची जारी करने के लिए संत समाज की वृहद बैठक बुलाई। नतीजा हर बार सिफर रहा। चूंकि अखाड़े ही कभी राधे मां, कभी निजानंद तो कभी नित्यानंद के महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान करते रहे, अत: किसी न किसी अखाड़े का विरोध सामने आता रहा। संत समाज की सर्वोच्च अखाड़ा परिषद ने आसाराम बापू, रामपाल, रामवृक्ष यादव आदि के ज्वलंत सवालों के समय आपत बैठक बुलाकर फर्जी साधुओं की सूची जारी करने की फिर से घोषणा की। किसी न किसी अखाड़े के विरोध के चलते अलबत्ता फर्जियों की सूची जारी न हो पाई।
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यह बताना कम आश्चर्यजनक नहीं होगा कि बाबा गुरमीत राम रहीम को प्रयाग अर्द्धकुंभ में एक अखाड़े के महामंडलेश्वर बनाने की तैयारियां शुरू हो चुकी थी। फर्जी बाबाओं का चयन करने के लिए बनाई गई संत समितियों ने कई बार राम रहीम को भी फर्जियों की सूची में शामिल करते हुए सूची जारी करने का आग्रह अखाड़ा परिषद से किया। इसका विरोध भीतर से ही उपजा और सूची जारी नहीं हो पाई। यहां तक की संतों के सभी संगठनों को जोडक़र बनाने के लिए गठित समिति भी समन्वय टीम नहीं बना पाई।
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