नारायणबगड़। नंदाष्टमी पर्व पर नंदाधाम भारकोटबार (भंगोटा) में मां नंदा को डोली में विराजमान कर शृंगार, खाद्य तथा फल-फूलों की भेंट चढ़ाकर कैलास के लिए विदा किया गया। देवी को विदा करते हुए ध्याणियां देवी से लिपट कर खूब रोई।
मंगलवार को ब्रह्मबेला में नंदा पुजारी सच्चिदानंद सती, जगदीश सती, रजनीश सती, हर्षवर्धन सती ने पूजा शुरू की। मां नंदा को भोग लगाने के बाद केले के तने पर बनाई गई मां नंदा की मुखाकृति (मूर्ति) की प्राण प्रतिष्ठा की गई। ध्याणियों और श्रद्धालुओं ने मां नंदा को नए अनाज का भोग लगाया। नंदा को कैलास विदा करने से पहले ध्याणियों ने मां का शृंगार किया। देर शाम देवी को गाजे बाजों के साथ भारकोटबार की ऊंची पहाड़ी (कैलास) के लिए नंदा को विदा किया गया। इससे पूर्व सोमवार रात को जागर सम्राट बुद्धि सिंह दानू ने दयोल खोलू मां ढोल दमों बजण बैठिगे..., मैत छोड़िके जाण लगी नंदा कैलास... सहित लोक गायिका हेमा नेगी करासी ने नंदा के जागर गाकर माहौल को भक्तिमय किया। इस मौके पर आयोजित समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह मिंगवाल सहित रैंस, चोपता, तुनेड़ा सहित आयोजन कर रहे नौ गांवों के ग्रामीण और श्रद्धालु मौजूद थे।
लंगासू की चंडिका ने किया गांवों का भ्रमण
कर्णप्रयाग। लंगासू के चंडिका मंदिर में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान के तहत देवी चंडिका ने नंदाष्टमी पर गांवों का भ्रमण कर श्रद्धालुओं को आशीष दिया। इस दौरान देवी ने लंगासू, उत्तरों, चमाली आदि गांवों का भ्रमण किया। चमाली में पांडव चौक में देवताओं के पश्वाओं ने देवनृत्य किया। दूसरी ओर कंडारा में देवी दशमद्वार की डोली के दर्शनों के लिए वर्तमान और पूर्व विधायक ने मत्था टेका। मंगलवार को देवी दशमद्वार की डोली ने गंगा स्नान किया। दूसरी ओर डिम्मर में नंदाष्टमी पर्व पर गांव के चौंरी में नंदा देवी की पूजा की गई।