संदीप थपलियाल
श्रीनगर। एनआईटी उत्तराखंड के स्थायी कैंपस के मसले पर भाजपा किरकिरी झेल रही है। इस मामले ने भाजपा को पीछे धकेल दिया है। पार्टी ने जिला प्रभारी महेंद्र भट्ट के जरिए संदेश भिजवाकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की है। वहीं इस पूरे मामले में विपक्षी पार्टी कांग्रेस की चुप्पी भी आश्चर्यजनक है।
भाजपा कार्यकर्ताओं को आंदोलन में शामिल न होने का फरमान जारी किया गया है। वहीं शासन के माध्यम से डीएम और एसएसपी को श्रीनगर भेजकर श्रीनगर बंद को स्थगित करवाने की कोशिश की गई। इसमें मुख्य फोकस व्यापार सभा पर रहा। ताकि व्यापारी अपने प्रतिष्ठान बंद न करें और आंदोलन स्थगित हो जाए। इधर, इस पूरे मामले में विपक्षी पार्टी कांग्रेस चुप्पी साधे हुए है। पार्टी अभी तक खुलकर सामने नहीं आई है। केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद एनआईटी के स्थायी परिसर का निर्माण शुरू न होने से अंदरखाने भाजपाई भी चिंतित है। उन्हें डर है कि अगले साल के नगर पालिका चुनाव में कहीं पार्टी को इसका खामियाजा न भुगतना पड़े। बहरहाल जहां जनता स्थायी परिसर का निर्माण सुमाड़ी में चाहती है। वही एनआईटी में पढ़ रहे छात्र मैदान में शिफ्टिंग चाहते हैं। प्रगतिशील जनमंच के नवीन नौटियाल कहते हैं कि दोनों आंदोलन के लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार है। अगर सुमाड़ी में निर्माण शुरू हो जाता, तो यह नौबत नहीं आती। प्रदेश के मुखिया इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। भाजपा के अन्य नेता आंदोलन के बाद यह बोल तो रहे हैं कि सुमाड़ी में एनआईटी बनेगी, लेकिन कब बनेगी और क्यों देरी हो रही है इसका उनके पास कोई जवाब नहीं है। ।