श्रीनगर। एनआईटी उत्तराखंड में सुविधाओं और स्थायी कैंपस की मांग के लिए हड़ताल कर रहे छात्र-छात्राओं से वार्ता करने पुलिस-प्रशासन की टीम संस्थान में पहुंची। टीम का नेतृत्व कर रहे एसडीएम मायादत्त जोशी ने छात्र परिषद के पदाधिकारियों से वार्ता करते हुए अपील की कि उनकी मांगें सरकार तक पहुंच गई हैं। लिहाजा आंदोलन खत्म कर दें। इधर, छात्र-छात्राएं चौथे दिन भी प्रशासनिक भवन के प्रांगण में धरने पर बैठे रहे।
एनआईटी उत्तराखंड के छात्र-छात्राएं मैदानी क्षेत्र में स्थायी परिसर निर्माण सहित अन्य मांगों के लिए रविवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। बुधवार को एनआईटी प्रशासन को भनक लगी कि छात्रों का राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने या कैंडल मार्च निकालने का इरादा है। इसके बाद संस्थान के कुलसचिव कर्नल सुखपाल सिंह ने तहसील प्रशासन को इसकी सूचना दी।
एसडीएम माया दत्त जोशी, तहसीलदार सुनील राज, कोतवाल एनएस बिष्ट और एसएसआई जितेंद्र चौहान ने एनआईटी पहुंचकर छात्र परिषद से वार्ता की। पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने छात्रों को सलाह दी कि वे पढ़ाई पर ध्यान दें। उनकी मांगों को मानव संसाधन मंत्रालय और प्रदेश शासन तक पहुंचा दिया गया है। एनआईटी के स्थायी कैंपस का निर्माण कहां होना है? यह सोचना शासन का काम है। यदि वह संस्थान से बाहर निकलकर प्रदर्शन करेंगे, तो कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, आंदोलित छात्र-छात्राएं धरने पर डटे रहे। उनका कहना है कि समय के साथ-साथ एनआईटी में छात्र बढ़ते गए, लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई, जिससे उनको दिक्कत हो रही है।
पुलिस ने मांगी सूचना
श्रीनगर। कोतवाली पुलिस ने एनआईटी से कक्षाओं से अनुपस्थित छात्रों की सूची मांगी है। इसके अलावा आंदोलन की वीडियो रिकार्डिंग के लिए भी कहा गया है ताकि आवश्यकता पडने पर कानूनी कार्रवाई की जा सके।
कक्षाओं में वापस लौटने का नोटिस
श्रीनगर। आंदोलन कर रहे छात्रों को छात्र परिषद के माध्यम से कक्षाओं में वापस लौटने का नोटिस दिया गया है। इसमें कहा गया है कि उनसे कई दौर की वार्ता हो चुकी है। लेकिन छात्रों के अविश्वास के कारण वह सफल नहीं हो रही हैं। छात्र अधिकारियों पर भरोसा करे। रजिस्ट्रार कर्नल सुखपाल सिंह ने बताया कि सभी छात्रों को यह नोटिस मेल भी किया जा रहा है।
तीन सुरक्षा कर्मी बर्खास्त
श्रीनगर। बिना उच्चाधिकारियों की अनुमति के एनआईटी परिसर में टेंट सामग्री ला रहे ट्रक को प्रवेश देने पर संस्थान ने एक सुपरवाइजर और दो गार्ड को सेवा से हटा दिया है। दरअसल, आंदोलनकारी छात्र धरना स्थल पर टैंट लगाना चाह रहे थे।