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एनजीटी के आदेशों की परवाह नहीं

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
गंगा को प्रदूषित होने से बचाने के लिए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के आदेशों की सिस्टम को परवाह नहीं है। यही कारण है कि सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान के लिए आए लाखों श्रद्धालुओं के लिए शौचालयों की व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा किनारे मलमूत्र त्याग कर नदी को प्रदूषित किया है।
मल की गंदगी से हर की पैड़ी क्षेत्र के मेेला मैदानों पंतद्वीप, चमगादड़ टापू, लालजीवाजा, मेला नियंत्रण भवन के सामने रोडी बेलवाला, दीनदयाल उपाध्याय पार्किंग क्षेत्र तथा शंकराचार्य चौक से पावन धाम की पुलिया भूपतवाला में हाईवे किनारे गंदगी हो गई है। रविवार रात में ही श्रद्धालुओं ने गंगा को बुरी तरह से प्रदूषित किया है। एनजीटी की ओर से प्रतिबंधित पॉलिथीन, प्लास्टिक तथा थर्माकोल डिस्पोजलों को उपयोग शनिवार से जगह-जगह होने लगा था। हरकी पैड़ी क्षेत्र में नाईघाट, सुभाषघाट, गऊघाट, कांग्रेस भवन के पास खाद्य सुरक्षा अधिनियम को धत्ता बताते हुए अवैध लंगरों पर भिखारियों के साथ सोमवती अमावस्या स्नान के लिए गरीब श्रद्धालुओं की लाइनें लगी रही। पॉलिथीन के खिलाफ एक दिन कार्रवाई करने के बाद जिला प्रशासन पीछे हट गया है।
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मोबाइल टॉयलेट, यूरीनल की जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
गंगा नदी तथा गंगाघाटों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए शहर से बाहर मेला क्षेत्र व गंगा नदी के किनारे तथा गंगाघाटों के आसपास पर्याप्त संख्या में मोबाइल टॉयलेट व यूरीनल की व्यवस्था करनी होगी।
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अर्द्धकुंभ मेला 2016 में बड़ी संख्या में मोबाइल टॉयलेट व यूरीनल की व्यवस्था को स्थायी करने की जरूरत है। ताकि जब भी कोई मेला आए तब मोबाइल शौचालयों का उपयोग किया जा सके। इसके साथ ही शहर के अंदर सैकड़ों पुराने सार्वजिनक शौचालय हैं। ऐसे शौचालयों को कब्जा मुक्त करने की जरूरत है। अर्द्धकुंभ मेले से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकारी बजट से तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए बने सार्वाजनिक शौचालयों को अवैध रूप से कब्जा कर बंद करने को बहुत ही गंभीरता से लिया था। उन्होंने तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य नगर अधिकारी तथा एक पुलिस इंस्पेक्टर की कमेटी बनाकर शौचालयों को कब्जामुक्त कराने का निर्देश दिया था। सीडीओ जब शौचालयों की जांच करने निकली तो उन्हें कहीं शौचालय में बकरियां मिली, कहीं चारपाई पर लगा बिस्तर मिला, कहीं शौचालय पर दोमंजिला मकान बना मिला था। एक शौचालय को सामुदायिक भवन में परिवर्तित करना पाया गया था, जिसमें अवैध रूप से शराब बेचने का धंधा होने की जानकारी मिली थी। एक शौचालय में ब्यूटी पार्लर का धंधा चलता मिला था और एक शौचालय को तोड़कर कमरे का रूप देकर कब्जा करने का प्रयास करना पाया गया था। उत्तराखंड सूचना आयोग ने जिलाधिकारी को शौचालयों को कब्जा मुक्त कराने का निर्देश दिया था, परंतु किसी ने कुछ किया नहीं है। जब तक इस स्थिति को बदलना नहीं जाता है तब तक न स्वच्छ भारत का सपना साकार हो सकता है और न गंगा को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है।
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