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फाइलों में सिमटी आयुष ग्राम की योजना

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देवाल। विकासखंड के घेस गांव को आयुष ग्राम बनाए जाने की योजना फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई है। वर्ष 2013 में यहां आयुष ग्राम बनाए जाने की बात की गई। इसके बाद ग्रामीणों ने विभाग को 80 नाली भूमि भी दी, लेकिन चार साल बीतने के बाद भी मामला फाइलों में ही लटका है।
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ब्लॉक का घेस गांव 11500 फीट की ऊंचाई पर बसा है। यहां ग्रामीण डेढ़ दशक से पारंपरिक फसलों से हटकर जड़ी-बूटी उगाते हैं। घेस के पूर्व प्रधान केशर सिंह बिष्ट तथा गढ़वाल विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन से यह प्रदेश का पहला जड़ी बूटी उत्पादन गांव बना। ग्रामीणों ने पहली बार वर्ष 2005 में दिल्ली तथा रामनगर की कंपनियों को उत्पादित कुटकी बेची। इससे उत्साहित किसानों ने अतीश, कूट, गंदरायण, जटामासी, कालाजीरा, भूतकेश धूप, वन तुलसी आदि जड़ी बूटी का उत्पादन शुरू किया। वर्तमान में इस उत्पादन से घेस और हिमनी गांवों के करीब 120 परिवार जुड़े हैं और सालाना एक से दो लाख तक की आय अर्जित कर रहे हैं। घेस के आसपास हिमनी, बलाड़ तथा पिनाउ ग्राम पंचायत में कई जड़ी-बूटियों का अपार भंडार है। इसे बढ़ावा देने के लिए यहां ग्रामीणों ने आयुष ग्राम बनाने की मांग की। हालांकि, विभाग ने यहां 80 नाली भूमि 2013 में ली। लेकिन तब से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई है।

इनका कहना है-
घेस गांव में कई प्रकार की जड़ी-बूटियों का अपार भंडार है। विभाग द्वारा इसे आयुष गांव बनाने के लिए 80 नाली भूमि मांगी गई। इससे किसानों को तकनीकी जानकारी के साथ ही विपणन की भी सुविधा मिलती, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के वाद भी प्रस्वाव पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस बारे में क्षेत्र का एक शिष्टमंडल शीघ्र सीएम से मिलेगा।-केशर बिष्ट, पूर्व प्रधान घेस
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घेस राज्य का पहला गांव है जहां पर जड़ी बूटी का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है। घेस को आयुष ग्राम बनाने का प्रस्ताव 8 अगस्त को पुन: निदेशालय को भेजा गया है। आयुष ग्राम स्थापित होने पर घेस सहित अन्य गांवों के किसानों को बहुत लाभ होगा। -- डा. रघुपीर सिंह, जिला आयुर्वैदिक एवं यूनानी अधिकारी चमोली।
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