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बाजार में बिक रहे कटे फल, सब्जियों के साथ अन्य खाद्य पदार्थ

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
जिला खाद्य सुरक्षा विभाग के दावे के विपरीत धर्मनगरी में कटे फलों और सब्जियों की बिक्री पर रोक नहीं लग पाई है। इन कटे हुए फलों पर धूल, वाहनों के धुएं के साथ ही मक्खियां और अन्य कीटाणु भी बैठते हैं जो कि बीमारी का कारण बनते हैं।
बाजार में कटे फल व अन्य खाद्य पदार्थ खुले में बेचे जा रहे हैं। शहर में चारों तरफ खुले नाले-नालियों के चलते भिनभिनाती मक्खियों से हर समय बीमारी फैलने का खतरा रहता है। ठेलों पर अनार, अनानास, नारियल, पपीता, अमरूद सहित तमाम कटे फल खुले में बेचे जा रहे हैं। दुकानदार इनको ढकने की भी जहमत नहीं उठा रहे । इसके अलावा टिक्कियां, समोसा, बर्गर, चाऊमीन भी ठेलों पर बेचे जा रहे हैं। इन पर भी सड़क की धूल और गंदगी बैठती है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में संक्रामक रोगों का खतरा अधिक रहता है।
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जिला अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डा. अनुपम चतुर्वेदी ने बताया कि लोग कटे हुए फलों का सेवन कतई न करें क्योंकि इन फलों पर कीटाणु, जीवाणु बैठते हैं जो कि खाने से मानव शरीर में पहुंच कर संक्रामक रोग फैलाने का काम करते हैं। इसके अलावा पॉलिथीन से ढके हुए फल भी शुद्ध नहीं रहते क्योंकि आधा घंटे से अधिक फल कटने के बाद अपनी गुणवत्ता खोने लगता है।
हाजमा बिगाड़ने के लिए काफी
विशेषज्ञों की माने तो शहर के वातावरण में धूल कण और अप्रत्याशित कार्बन कटे फलों के साथ पेट का हाजमा बिगाड़ने के लिए काफी है। लोगों को यकीन नहीं होगा कि पपीता और शीतल पेय में चीनी से 400 गुना मिठास वाला सैक्रीन मिलाने की शिकायत बढ़ी है। ऐसे फल तो और भी घातक हो सकते हैं।
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खाद्य पदार्थों की जांच और कार्रवाई के लिए अभियान जारी है। रुड़की और हरिद्वार में टीम अपना काम कर रही है। यदि फिर भी बाजार में खुले में या कटे हुए फलों के साथ अन्य खाद्य पदार्थ बेचे जा रहे हैं तो कार्रवाई को विभाग फिर फील्ड में उतरेगा।
राजेंद्र सिंह, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
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