अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि संस्कृत के बिना भारत का अस्तित्व अधूरा है। भारत की ज्ञान-विज्ञान, सामाजिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक आदि परंपराओं का विकास संस्कृत से ही संभव है।
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से आयोजित विशाल संस्कृत शोभायात्रा में मुख्य अतिथि प्रो. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि संस्कृत के विकास और प्रचार प्रसार के लिए एक बड़े आंदोलन की जरूरत है। अकादमी के सचिव गिरधर सिंह भाकुनी ने कहा कि संस्कृत भाषा को जनभाषा बनाने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा। संस्कृत भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रताप सिंह ने कहा कि संस्कृत के प्रचार-प्रसार और विकास में उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने कहा कि संस्कृत के उज्ज्वल भविष्य के लिए युवाओं को आगे आना होगा। शोभायात्रा का आयोजन श्रीभगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय ज्वालापुर से उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिसर ऋषिकुत तक किया गया। शोभायात्रा में करीब 800 छात्र और 100 शिक्षकों ने भाग लिया। शोभायात्रा का शुभारंभ गुरुकुल कांगड़ी विवि के कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार, आकादमी के सचिव गिरधर सिंह भाकुनी, उत्तराखंड संस्कृत विवि के कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी, डा. प्रेमचंद्र शास्त्री, डा. सुमन मिश्रा, प्रो. ब्रह्मदेव, डा. भोला झा ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर किया। संचालन डां. हरीशचंद्र गुरुरानी और डा. प्रकाश पंत ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर अकादमी के कोषाध्यक्ष डा. तंजीम अली, राधेश्याम, डा. देवी प्रसाद उनियाल, डा. निरंजन मिश्र, डा. अरविंद नारायण मिश्र, डा. इंदु शर्मा, लोकश शास्त्री, डा. संयोगिता, डा. विकास आदि मौजूद थे।