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हरकी पैड़ी को नहर नहीं मानता यूपी

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कौशल सिखौला
हरिद्वार।
करीब छह महीने पहले हरीश रावत सरकार ने हरकी पैड़ी की जिस गंगा को नहर मानते हुए शासनादेश जारी किया था, उसे उत्तर प्रदेश नहर नहीं मानता। यूपी का कहना है कि हरकी पैड़ी तो गंगा है और लाखों वर्षों से इसी तट पर स्नान होते हैं। उधर जिन पुरोहितों ने वर्ष 1914 से 1916 तक लंबा संग्राम लड़कर अंग्रेजों को परास्त किया था, उन्होंने शासनादेश हटाने से संबंधित दो बार पारित प्रस्ताव अब तक भी शासन को नहीं भेजा है। प्रदेश के शहरी विकास मंत्री ने पिछली सरकार के शासनादेश पर पुनर्विचार की बात स्वीकार करते हैं।
काल के किसी खंड में देवों और असुरों के बीच हुए संग्राम के बाद समुद्र मंथन किया गया था। समुद्र से अमृत कलश निकलने पर इंद्र के पुत्र जयंत उसे लेेकर भागे थे और विश्राम के लिए चार स्थानों पर रखा था। तभी हरकी पैड़ी पर अमृत छलका और तब से अमृतमयी कुंभ आदि के गंगा स्नान हरकी पैड़ी पर होते आए हैं। गंगा की अस्मिता को बचाने के लिए तीर्थ पुरोहितों ने महामना मालवीय के नेतृत्व में दो वर्षों तक अंग्रेजों से संग्राम किया और देश की 32 रियासतों की सेनाएं भीमगोड़ा में अंग्रेजों द्वारा बनाए जा रहे बांध के खिलाफ आ खड़ी हुई। अंत में महामना की जीत हुई और यह आंदोलन विश्व का पहला बांध विरोधी आंदोलन माना गया। तब बांध को यहां से हटाकर गंगा की नील धारा पर संक्षिप्त रूप में बनाया गया। हरकी पैड़ी पर गंगा के अविच्छिन्न जल में स्नान होते आ रहे हैं।
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हरीश रावत सरकार ने भूमाफियों के दबाव में जाते जाते हरकी पैड़ी को गंगा नहर घोषित कर दिया, ताकि 200 मीटर के तटीय क्षेत्र में निर्माण का लाभ प्रॉपर्टी डीलरों को मिल जाए। इसके खिलाफ हरकी पैड़ी की प्रबंधकारिणी संस्था गंगा सभा दो बार शासनादेश के विरुद्ध प्रस्ताव पारित कर चुकी है। लेकिन पुरोहितों की इस संस्था पर भी माफियाओं का दबाव पड़ा और छह महीनों में भी वह प्रस्ताव शासन को नहीं भेजे गए।
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उत्तर प्रदेश के सिंचाई मंत्री डा. धर्मपाल सिंह ने इस संबंध में बताया कि नहर और गंगा उत्तर प्रदेश के अधिकार क्षेत्र में हैं। यूपी ने ऐसा कोई शासनादेश जारी नहीं किया। उत्तराखंड के शासनादेश का कोई असर गंगा पर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि हरकी पैड़ी आज भी गंगा हैं और रहेगी। प्रदेश के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि पिछली सरकार ने जो शासनादेश जारी किया है, आपत्ति आने पर उस पर विचार किया जाएगा। जहां तक हरकी पैड़ी का सवाल है, वह तो गंगा है और गंगा का यह स्थान कोई नहीं छीन सकता। सरकार विचार करेगी। याद रहे कि इस संबंध में शहरी विकास विभाग का शासनादेश जारी होने के बाद उत्तराखंड के सिंचाई सचिव आंनदवर्धन ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा था कि नहर का शासनादेश केवल सिंचाई विभाग जारी कर सकता है। उत्तराखंड के सिंचाई विभाग ने ऐसा कोई शासनादेश जारी नहीं किया जो हरकी पैड़ी को गंगा नहर कहे। गंगा सभा के महामंत्री रामकुमार मिश्रा ने स्वीकार किया कि गंगा मैया को नहर बताने से पुरोहित समाज बहुत नाराज है। गंगा सभा की कार्यकारिणी और सैकड़ों सदस्यों वाली प्रधान सभा में भी इस संबंध में शासनादेश वापस लेने का प्रस्ताव पारित किया है। दुर्भाग्य से यह प्रस्ताव अभी भी शासन को नहीं भेजा जा सका है। इसके लिए उन्होंने अपनी और अपने कार्यालय की गलती स्वीकार की। गंगा सभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि यह प्रस्ताव शासन को शीघ्र भिजवाया जाएगा। सभा नहर बताने के खिलाफ किसी भी संघर्ष को तैयार है।
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