अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत गंगा नदी में मलजल जाने से रोकने के लिए सराय ज्वालापुर में 14 एमएलडी का सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) का निर्माण होना है। इसके लिए कार्यदायी संस्था ने टेंडर तो करा दिए, लेकिन नगर निगम से एनओसी नहीं ली। ऐसे में काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
नमामि गंगे योजना के तहत गंगा नदी में मलजल जाने से रोकने के लिए सराय ज्वालापुर में बनने वाली सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) के निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था निर्माण एवं अनुरक्षण शाखा (गंगा) ने टेंडर करा लिए हैं। लेकिन जिस जमीन पर एसटीपी बननी है उसकी एनओसी उसके पास नहीं है। अब काम शुरू कराने के लिए विभाग के अधिकारी नगर निगम से एनओसी के लिए भटक रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी अवर अभियंता अनिल शुक्ला नगर निगम के कर एवं राजस्व अधीक्षक रमेश चंद्र रावत से मिले। उनका कहना था कि नगर निगम की जमीन पर इससे पहले जो सीवरेज पंपिंग स्टेशन बने हैं उनका लगभग 50 लाख रुपया बकाया है। इसलिए आगे के लिए एनओसी देने से पहले नगर निगम के उच्चाधिकारियों के संज्ञान में प्रकरण लाया जाएगा। उनके निर्देशानुसार ही कार्रवाई की जाएगी। कार्यदायी विभाग के अवर अभियंता अनिल शुक्ला का कहना है जमीन तो हमारे कब्जे हैं और एनओसी नहीं भी मिली तो हम काम शुरू करा देेंगे।
सर्किल रेट पर जमीन लेने का है प्रावधान
सीवरेज पंपिंग स्टेशन का निर्माण करने के लिए कार्यदायी संस्था को सर्किल रेट से नगर निगम को भुगतान करना होगा। इसका बकायदा शासनादेश जारी है। लेकिन परियोजना की डीपीआर बनाते समय कार्यदायी संस्था जमीन की कीमत डीपीआर में शामिल नहीं करती है। विभाग सरकारी काम बताकर नगर निगम को भुगतान करने से हाथ खड़े कर देता है। भगत सिंह चौक के पास टिबड़ी की जमीन पर बना सीवरेज पंपिंग स्टेशन की जमीन का भुगतान का मामला अब तक नहीं सुलझा है। कार्यदायी संस्था ने परियोजन को क्लोज करना बताकर जमीन का भुगतान करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। यही स्थिति अब सराय में भी खड़ी होने वाली है।
जमीन तो हमारे पास पहले से है
नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत सराय ज्वालापुर में 14 एमएलडी का एसटीपी बनाया जाना है और जगजीतपुर में 68 एमएलडी का। इनके बनने के बाद हरिद्वार में गंगा नदी में सीवरेज का जाना शत-प्रतिशत बंद हो जाएगा। नालों को भी टेप करने का काम किया जाना है। नगर निगम की एनओसी तो सिर्फ औपचारिकता है। सराय ज्वालापुर में 2005 से जमीन हमारे पास है। वहां 20 एमएलडी का एसटीपी पहले ही स्थापित है और उसके साथ की जमीन पर ही 14 एमएलडी का नया एसटीपी बनाया जाना है। एनओसी नहीं भी मिलेगी तो एसटीपी का काम शुरू हो जाएगा।
- आरके जैन परियोजना प्रबंधक, निर्माण एवं अनुरक्षण शाखा (गंगा)।