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प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर मेयर को बर्खास्त करने की मांग

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
प्रेमनगर आश्रम ट्रस्ट ने मेयर मनोज गर्ग पर एक बार फिर से हमला बोला है। ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर मेयर मनोज को बर्खास्त करने कि मांग की है। उन्होंने विहिप, भाजपा और कई विधायकों के आश्रम के पक्ष में होने का दावा भी किया है।
शनिवार को प्रेमनगर आश्रम कैंपस में ट्रस्ट के प्रबंधक ओपी शर्मा, सचिव रमणीक भाई और अखिल भारतीय साधु समाज के पदाधिकारी महात्मा शब्दानंद ने संयुक्त रूप से कहा कि प्रेमनगर आश्रम लाखों अनुयायियों की आस्था का केंद्र है और वे इसे अपना मंदिर मानते है। मेयर मनोज गर्ग ने उनके मंदिर को अपवित्र कर घृणित कार्य किया है। दावा किया कि देश भर में मेयर के इस कृत्य की आलोचना हो रही है। मंदिर रूपी आश्रम के मुख्य गेट पर कूड़ा डालकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को भी पलीता लगाया है
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आरोप लगाते हुए मेयर और उनके समर्थकों ने अराजकता की है। वे इन सबके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का पूरा मन बना चुके है। कहा कि आश्रम के खिलाफ ये एक सोची समझी साजिश है। मेयर बता देते तो पूरा आश्रम उनके सहयोग के लिए खड़ा होता, लेकिन उन्होंने तो सीधे ही दीवार तोड़ दी। जनसहयोग के लिए आश्रम कभी भी पीछे हटने वाला नहीं है। एक सवाल के जवाब में पदाधिकारी बोले कि आश्रम की दीवार तोड़ने के पीछे के मकसद के बारे में मेयर ही जानते होंगे। पिछले साल भी दीवार का एक कोना तोड़ा था, तब से अब तक मेयर कहां थे। नाला बनवाना था तो अब तक बन जाना चाहिए था। पंद्रह साल से शहर जलभराव से जूझ रहा है। अब तक आमजन को इस संकट से निजात दिलाने के लिए रणनीति तैयार क्यों नहीं की गई।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि आखिर मेयर को रेफर क्यों करना पड़ गया। किस आधार पर उन्हें रेफर करना पड़ा, ये हर कोई जानना चाहता है। आरोप लगाया कि मेयर नाटक कर रहे हैं।
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मदन कौशिक को लेकर भी तेवर तल्ख
हरिद्वार। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक को लेकर भी आश्रम के सचिव रमणीक भाई के तेवर तल्ख दिखे। बोले कि घटना वाले दिन कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक आश्रम में आए थे। उन्होंने पूरे घटनाक्रम के संबंध में जानकारी ली और चले गए। बोले कि टूटी दीवार देखने के लिए जब मौके पर चलने को कहा, तब उन्होंने जाने से इनकार कर दिया। बोले कि उन्हें मौके पर जाना चाहिए था, लेकिन वे नहीं गए। केवल घटनाक्रम को जानकर चले गए। इस मुद्दे पर कुछ बोलने के लिए भी दो दिन का समय देने की बात कही थी। बकौल सचिव की उन्होंने विवाद से दूर होने की बात कही थी।
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