कर्णप्रयाग। रविवार से शुरू होने वाले तीन दिवसीय मेले के लिए किमोली के लक्ष्मीनारायण मंदिर के साथ ही पूरा कपीरी क्षेत्र सज गया है। कपीरी पट्टी की चौदह ग्राम पंचायतों के केंद्र बिंदु किमोली में भगवान नारायण (विष्णु) और लक्ष्मी ने विश्राम किया था, जिसके बाद से यहां लक्ष्मीनारायण का पौराणिक मंदिर है। यहां नि:संतान दंपति संतान प्राप्ति के लिए यहां पूजा के लिए पहुंचते हैं।
किमोली गांव के 95 वर्षीय मदन सिंह रावत बताते हैं कि पौराणिक काल में भगवान नारायण ने बदरीनाथ में शंखासुर का वध करने के बाद किमोली में पीपल की छांव में माता लक्ष्मी के साथ विश्राम किया था। इसके बाद से यहां लक्ष्मीनारायण की स्थापना भी हुई। यहां सच्चे मन से नि:संतान दंपति पूूजा करें तो संतान सुख प्राप्त होता है। यहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मेला लगता है जो तीन दिनों तक चलता है। मेला अध्यक्ष खिलदेव सिंह रावत ने बताया कि ग्रामीण मेलेेे का आयोजन अपने निजी संसाधनों से करते हैं, जिसमें कपीरी पट्टी की सभी चौदह ग्राम पंचायतों के अलावा दशोली के लोग भी सहयोग करते हैं। मेले में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे और इस बार मेले में लक्की ड्रा आकर्षण का केंद्र होगा।