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उतराखंड तकनीकि विवि का प्रयोगात्मक परीक्षा करवाने का फरमान

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संदीप थपलियाल
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श्रीनगर।
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) की ओर से राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर को प्रयोगात्मक परीक्षा में फेल हो गए परीक्षार्थियों की परीक्षा दोबारा से कराने का निर्देश किसी के गले नहीं उतर रहा है। हालांकि, कॉलेज प्रशासन ने एमसीआई (भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद) के मानकों का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं। वहीं, विवि के परीक्षा नियंत्रक डा. कुंवर सिंह वैसला का कहना है कि छात्रों के अनुरोध पर उक्त निर्देश दिया गया है।
इधर, इस निर्देश के पीछे छिपे रहस्यों के बारे में कई तरह की चर्चाएं हैं। कहा जा रहा है कि विवि स्वयं परीक्षा करवाता है और नियमों से भलीभांति वाफिक होता है। ऐसे में नियमविरुद्ध दोबारा से प्रयोगात्मक परीक्षा कराने के लिए क्यों दबाव बनाया जा रहा है? क्योंकि विश्वविद्यालयों में ऐसा कोई नियम नहीं है कि फेल हुए परीक्षार्थियों के लिए अलग से परीक्षा करवाई जाए।
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कुछ समय पूर्व श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस बैच 2013 के छात्र-छात्राओं की तृतीय प्रोफेशनल परीक्षा पार्ट-1 की अनुपूरक परीक्षा (सप्लीमेंटरी) का रिजल्ट जारी हुआ। इसमें कुछ परीक्षार्थी थ्योरी में पास हो गए, लेकिन प्रैक्टिकल में फेल हो गए। फेल हुए छात्रों ने विवि से पुनर्मूल्यांकन की मांग की, लेकिन प्रैक्टिकल का पुनर्मूल्यांकन नहीं किया जा सकता है।
इस पर यूटीयू के परीक्षा नियंत्रक ने कॉलेज को पत्र भेजते हुए फेल हुए छात्रों की प्रयोगात्मक परीक्षा अतिशीघ्र कराने के निर्देश दिए, जबकि एमसीआई मानकों के अनुसार छात्र एक साल में दो परीक्षाओं में ही सम्मिलित हो सकता है। एक मुख्य परीक्षा और दूसरी सप्लीमेंटरी। यदि वह फेल होता है तो छह माह बाद दूसरी परीक्षा में शामिल हो सकता है। बीच में कोई परीक्षा नहीं कराई जा सकती है।

क्या कहते हैं अधिकारी
छात्र-छात्राओं के अनुरोध पर कॉलेज को दोबारा प्रैक्टिकल कराने के लिए कहा गया। यदि कॉलेज नियमानुसार ऐसा नहीं कर सकता है तो लिखित में अवगत करा दे। -डा. कुंवर सिंह वैसला, परीक्षा नियंत्रक यूटीयू, देहरादून
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फेल हुए छात्रों को नियत समय पर होने वाली प्रयोगात्मक परीक्षा में शामिल किया जा सकता है। उनके लिए बीच में कोई परीक्षा आयोजित नहीं करवाई जा सकती है। एमसीआई इसकी इजाजत नहीं देता है।- प्रो. सीएम रावत, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज श्रीनगर
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