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पूर्व ग्राम विकास अधिकारी भी निलंबित

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अमर उजाला ब्यूरो
श्यामपुर।
ग्राम गाजीवाली में सामने आए मनरेगा के 45 लाख रुपये के घोटाले में जिलाधिकारी ने गांव के पूर्व ग्राम विकास अधिकारी रामपाल सिंह को भी निलंबित कर दिया है। मौजूदा ग्राम विकास अधिकारी राजेंद्र राणा को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। रामपाल सिंह को खानपुर तथा राणा को लक्सर विकास खंड से संबद्ध किया गया है। पूरे मामले की जांच परियोजना निदेशक संजीव कुमार राय को सौंपी गई है।
जिलाधिकारी दीपक रावत ने मंगलवार को ग्राम गाजीवाली में छापा मारकर करीब 45 लाख रुपये के मनरेगा घोटाले का पर्दाफाश किया था। इस मामले में निजी तटबंध का निर्माण सरकारी योजना के तहत बना दिखाने के लिए फर्जी प्रस्ताव बनाने के मामले में तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी रामपाल सिंह की भूमिका पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया है। अब ऐसे अन्य लोगों की भी पड़ताल की जा रही है जिनके संज्ञान में मामला होने के बाद भी इसे लेकर चुप्पी साधे रखी। जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि इस बारे में विस्तृत जांच की जा रही है।
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बड़े साहब का दबाव, नप गए छोटे वाले
हरिद्वार/श्यामपुर। श्यामपुर क्षेत्र के गांव गाजीवाली में निजी वायरक्रेट तटबंध के मामले में सामने आए 45 लाख के घोटाले के मामले में ग्राम पंचायत स्तर के तीन कर्मचारियों पर तो गाज गिर गई लेकिन छोटे कर्मचारियों पर दबाव बनाने वाले बड़े साहब पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब अधिकारी इन अफसरों के खिलाफ जांच में सामने आने की बात कह रहे हैं। ग्राम गाजीवाली गांव में मंगलवार को जिलाधिकारी दीपक रावत ने मनरेगा योजना के तहत किया गया करीब 45 लाख का घोटाला पकड़ा था। इस मामले में ग्राम विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह राणा निलंबित कर दिया गया था मनरेगा के जेई सौरभ श्रीवास्तव और ग्राम प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही गई थी। रोजगार सहायक सोनू की सेवाएं समाप्त कर दी गई थी। इस मामले में कुछ कर्मचारियों ने जिलाधिकारी के सामने बताया था कि उन पर शासन में बैठे एक वरिष्ठ अधिकारी के कहने पर ही काम के बिल और प्रस्ताव तैयार कराए थे। जिलाधिकारी दापक रावत का कहना है कि किसी को दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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