अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
यहां प्रेमनगर आश्रम में चल रही ढोल और दमाऊं कार्यशाला में उत्तराखंड को एक नई धुन मिल गई है। उस धुन का नाम नमो नाद रखा गया है। कार्यशाला के तीसरे दिन सांस्कृतिक और अनुष्ठानिक धुनों को मिलाकर एक नई धुन तैयार की गई। जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण और अन्य ने धुन तैयार करने के बाद तीसरे दिन अभ्यास कराया।
उत्तराखंड की संस्कृति में विभिन्न ताल और सुर में ढोल और दमाऊं बजाया जाता है। सबको जोड़कर एक ताल बनाने की योजना में संस्कृति विभाग सफल हो गए हैं। तीसरे दिन सभी एक सुर और ताल में वाद्य यंत्र बजाते हुए दिखाई दिए। यह सुर और ताल को सांस्कारिक और अनुष्ठानिक धुन और ताल से मिलाकर बनाया गया है। अब राज्य की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सभी कलाकार एक ही धुन का प्रयोग करेंगे। इस धुन का नाम नमो नाद रखा गया है। दो दिन तक कई सुर ताल पर कलाकारों ने अभ्यास किया। आखिर तीसरे दिन वो हो गया, जिसका संस्कृति विभाग को इंतजार था। प्रीतम भरतवाण सभी कलाकारों को एक सुर और ताल में ले आए। जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण ने बताया कि सांस्कारिक और अनुष्ठानिक की धुंयाला, मन्नाज और बढाई धुनों को मिलकार एक नई धुन बनाई गई है। एक ही सुर ताल में पूरे प्रदेश के लोगों को जोड़ा गया है। इस धुन में ही समूचे प्रदेश के कलाकार अभ्यास कर रहे हैं। विश्व रिकार्ड बनाने के दिन इसी धुन को बजाया जाएगा। ढोल दमाऊं पर धुन तैयार होने के बाद एक- एक कलाकार का परिचय लिया गया। साथ ही कलाकारों को सांस्कृतिक विभाग की ओर से दी जाने वाली सहायताओं के बारे में भी जानकारी दी गई।
राज्य के बाहर भी बजेगी यह धुन
राज्य के बाहर सरकारी कार्यक्रम में उत्तराखंड के कलाकारों को बुलाया जाता था। अलग- अलग जिलों से पहुंचने वाले कलाकार अलग ही धुन में बजाया करते थे। अब एक ही धुन में बजाया जाएगा। अब ये ही धुन हमारी प्रदेश की धुन बनेगी।
छोटे बच्चों से प्रभावित हुए जागर सम्राट
कार्यक्रम में आए कई छोटे बच्चों से जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण प्रभावित हो उठे। उन्होंने बच्चों को गोद में उठाकर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। कहा कि यही हमारी संस्कृति है। उन्होंने चमोली के नौ वर्षीय अनिल को गोद में उठाया और अपना आशीर्वाद भी दिया। अनिल कक्षा दो में पढ़ता है। वह हरिद्वार में चल रही कार्यशाला में दमाऊं बजाने के लिए आया हुआ है। सबसे अधिक प्रभावित चार साल की उम्र से दमाऊं बजाने वाले ग्यारह वर्षीय सचिन भारती ने किया। सचिन अपने पिता गिरीश भारती के साथ हरिद्वार पहुंचा है। दोनों पिता पुत्र नारंगी गांव घाट चमोली से आए हैं। पिता गिरीश बताते है कि बेटा चार साल की उम्र से दमाऊं बजा रहा है। यहां तक सचिन स्कूल में सुबह होने वाली प्रार्थना में हारमोनियम, ढोल दमाऊं सहित अन्य वाद्य यंत्र भी बजाता है।