रतनमणी डोभाल
हरिद्वार।
उत्तराखंड सरकार सांस्कृतिक विभाग की जिस पर्वतीय लोकसंस्कृति का ढोल बजाने मैदान में उतरा है, वहीं टिबड़ी में भगत सिंह चौक के समीप संस्कृति विभाग का आडिटोरियम जरायम पेशेवरों का अड्डा तथा क्षेत्रवासियों का कूड़ाघर बन गया है। लोगों ने संस्कृति भवन में गाय, भैंस बांध रखी हैं।
करीब एक करोड़ खर्च करने के बाद सांस्कृतिक विभाग के निर्माणाधीन आडिटोरियम भवन का काम 2011 से बंद है। अब जबकि सांस्कृतिक विभाग हरिद्वार में नमो नाद कार्यक्रम चल रहा है, तब भी सांस्कृतिक विभाग का कोई अधिकारी आडिटोरियम भवन का हाल देखने नहीं गया है। आध्यात्मिक, वेद-वेदांत और गंगा की संस्कृति की दुनिया में पहचान बनाने वाले इस शहर से पर्यटन व संस्कृति मंत्री तथा शहरी विकास मंत्री का सीधा संबंध होने के बावजूद इस भवन की दुर्दशा की ओर झांकना इन्होंने भी गवारा नहीं किया। आडिटोरियम भवन को फाइनल टच देने के समय बीएचईएल ने विवाद खड़ा कर दिया। भूमि को अपनी बताकर न्यायालय से स्टे ले लिया था। भेल की करोड़ों की जमीन भूमाफियाओं ने कब्जा ली है, जिससे पीछा छुड़ाने के लिए भेल चाहता है कि आडिटोरियम की भूमि के साथ शेष भूमि भी सरकार ले लें ताकि अवैध कब्जों की जिम्मेदारी से वह बच जाएं।
आडिटोरियम भवन का काम 40 फीसदी हो चुका है। भूमि का विवाद को हल करने के लिए सचिव स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। भेल अधिकारियों के साथ कई बार बात की गई। वह चाहते हैं कि सरकार उस भूमि को भी ले लें जिस पर अवैध कब्जा हो चुका है। तत्कालीन जिलाधिकारी एचसी सेमवाल ने बात कर बीच का रास्ता निकालाने की कोशिश भी की थी। भेल को कार्यक्रम के लिए आडिटोरियम मुफ्त में देने को भी तैयार थे ताकि काम पूरा हो सके। बाकी भूमि को लेने पर शासन स्तर पर बात की जानी थी, परंतु भेल नहीं माना। अब फिर से भेल के साथ विवाद निपटाने का प्रयास किया जा रहा है। - अनुपम रत्न, परियोजना प्रबंधक, पेयजल निर्माण निगम, ऋषिकेश।