फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देश ने पलको पर बैठाया अपने ने भुलाया

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
सागर जोशी
हरिद्वार।
एक साथ ढोल और दमाऊं बजाने वाले और दो आवाज में गाने वाले ढोल वादक उत्तम दास को 1983 में राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित किया गया है। जबकि प्रदेश सरकार ने कभी उनकी सुध नहीं ली।
विज्ञापन

टिहरी जिले की बमुंड पट्टी के साबली निवासी उत्तम दास ने अपने पिता झोपड़िया दास का ढोल-दमाऊं बजाते हुए उसकी की बारीकियां सीखी। दस वर्ष की आयु के बाद पिता का निधन होने के बाद उत्तमदास ने ढोल- दमाऊ एक साथ बजाने का रियाज शुरू किया। एक साथ दोनों वाद्य यंत्रों को बजाने वाले उत्तम दास को वर्ष 1983 में दिल्ली में तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जेल सिंह के हाथों सर्वोत्कृष्ट वादक का अवार्ड दिया गया। इसके अलावा उत्तराखंड में भी विभिन्न संस्थाओं ने उत्तमदास सम्मानित किया। बावजूद इसके उत्तम दास को सरकार की ओर से अपेक्षित मान-सम्मान नहीं मिला। उत्तम दास अपनी पीढ़ी को आगे बढ़ा रहे है। प्रेमनगर आश्रम में चल रहे कार्यक्रम में पहुंचे प्रख्यात ढोल वादक उत्तम दास ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि सरकार की ओर से उनको कोई मदद नहीं दी गई है। कहा कि ढोल दमाऊं की विधा को जानने वालों को प्रोत्साहन देने से ही इसका संरक्षण हो पाएगा। कहा कि ढोल दमाऊं देवताओं का वाद्य यंत्र है और उसी के आधार पर इसे विभिन्न आयोजनों के मौके पर बजाया जाता है, लेकिन जानकारी के अभाव में नई पीढ़ी के लोगों तक इसका ज्ञान नहीं पहुंच रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें