अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
कनखल में एक महीने तक दक्षेश्वर बनकर विराजमान हुए भगवान शंकर सोमवार को कैलाश के लिए विदा हो गए। अब वे कैलाश पर ही भक्तों को दर्शन देंगे। सोमवार को हजारों शिव भक्तों ने पौराणिक शिवालयों में जाकर जलाभिषेक किया। अगले बरस सावन में भगवान भोलेनाथ एक बार फिर से हरिद्वार आएंगे।
श्रावण के आखिरी और पांचवें सोमवार को कनखल के प्राचीन दक्षेश्वर मंदिर में सर्वाधिक भीड़ रही। भक्तों ने रात में चंद्रग्रहण होने से चार पहर पूजा तो नहीं कि किंतु शाम तक जलाभिषेक का सिलसिला चलता रहा। शिव भक्तों ने बिल्वकेश्वर महादेव, गौरीशंकर, नीलेश्वर, दरिद्रभंजन, दुखभंजन, तिलभांडेश्वर, गुप्तेश्वर, समुद्रेश्वर, जटिलेश्वर, जालेश्वर, उदयेश्वर आदि मंदिरों में जाकर भगवान शिव पर चल चढ़ाया। चूंकि अधिकांश मंदिर दोपहर के समय बंद हो गए ऐसे में जलाभिषेक का सिलसिला दोहपर तक ही चला। शिवभक्तों ने श्रावण मास का अंतिम स्नान गंगातट पर किया। हरिद्वार की हरकी पैड़ी पर भी श्रावण का आखिरी पूर्णिमा स्नान करने के लिए कई भागों से श्रद्धालु पहुंचे।
महामृत्युंजय और अद्धनारेश्वर की प्रतिमाओं पर भी श्रद्धालुओं ने जल चढ़ाया। दोपहर बाद कई प्रतिमाओं पर भक्तों का जाना बंद हो गया। पंचपुरी के निर्जन मंदिरों में भी पूजा अर्चना की गई।
चंद्रग्रहण स्नान के लिए पहुंचे हजारों श्रद्धालु
हरिद्वार। चंद्रग्रहण पर गंगा स्नान करने के लिए देश के विभिन्न भागों से हजारों श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंचे। अर्द्धरात्रि में चंद्रग्रहण संपन्न होने के बाद मंगलवार की सवेरे गंगा स्नान होगा। नहाते ही श्रद्धालु लौट जाएंगे। इस बीच ग्रहण के चलते नगर के अधिकांश मंदिर दोपहर के समय बंद हो गए। हरकी पैडी सहित मंदिरों की आरती दोपहर के समय उतारी गई। ग्रहण का सूतक चलते ही मंदिरों के कपाट पूरी रात के लिए बंद कर दिए गए। चंद्रग्रहण के समय हजारों श्रद्धालु गंगा के अनेक तटों पर बैठकर जप तप करते हैं। खराब मौसम और बार बार हो रही वर्षा के कारण गंगा तट पर आधी रात तक बैठने वालों की भीड़ बहुत कम रही। ब्यूरो