जोशीमठ। बदरीनाथ क्षेत्र के उर्गम घाटी में स्थित श्री वंशी नारायण मंदिर के कपाट सोमवार को रक्षाबंधन के दिन सुबह छह बजे खुलेंगे। रक्षाबंधन के दिन उर्गम घाटी की बेटियां भगवान विष्णु को राखी बांधती हैं। इसके लिए ध्याणियां गांव पहुंच चुकी हैं। वंशी नारायण मंदिर के कपाट वर्षभर में रक्षाबंधन पर सिर्फ एक ही दिन के लिए खुलते हैं।
वंशीनारायण मंदिर उर्गम घाटी में बारह हजार फीट की ऊंचाई पर मध्य हिमालय के बुग्याल क्षेत्र में स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए उर्गम घाटी के ग्रामीण करीब सात किमी की पगडंडी नापते हैं। यही वजह है कि वंशीनारायण मंदिर में प्रतिदिन पूजा नहीं की जाती है।
मान्यता है कि उर्गम घाटी के भूमियाल भगवान वंशी नारायण को प्रतिवर्ष रक्षा बंधन पर राखी भेजते थे। अपने आराध्य देव भूमियाल के इसी वचन को निभाने के लिए उर्गम, डुमक और कलगोठ गांव की बहु-बेटियां रक्षाबंधन के दिन वंशीनारायण मंदिर में पूजा और राखी भेंट करने के लिए पहुंचते हैं और उर्गम घाटी की बेटियां भगवान विष्णु को राखी बांधती हैं। वंशी नारायण मंदिर में डुमक और कलगोठ गांव के ग्रामीण पूजा करते हैं। इस दिन भंडारे का आयोजन भी होता है। ग्रामीण मंदिर प्रांगण में एक-दूसरे को राखी भेंट कर त्योहार मनाते हैं। वंशी नारायण मंदिर कत्यूरी शैली में निर्मित है और यहां भगवान विष्णु चतुर्भुज स्वरूप में विराजमान हैं। साथ ही भगवान गणेश और वन देवियों की मूर्तियां भी मंदिर में मौजूद हैं।