घाट (चमोली)। जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान मंडल, उच्च शिखरीय पादप शोध केंद्र व नेशनल मिशन ऑफ हिमालय स्टडीज परियोजना की ओर से जीआईसी चौनघाट में जड़ी-बूटी दिवस मनाया गया। इस दौरान विद्यालय परिसर में औषधीय पौधे रोपे गए और काश्तकारों को 200 से अधिक औषधीय पौधे बांटे गए।
कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख कर्ण सिंह ने कहा कि राज्य का विकास जड़ी-बूटी कृषिकरण से किया जा सकता है। काश्तकार जड़ी-बूटी की खेती कर अच्छी आमदनी अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने काश्तकारों से अधिकाधिक संख्या में जड़ी-बूटी कृषिकरण से जुड़ने का आह्वान किया। जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान के वैज्ञानिक डा. सीपी कुनियाल ने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कई बेशकीमती जड़ी-बूटियां बिखरी पड़ी हैं। इनके संरक्षण पर जोर देना चाहिए। वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डा. विजयकांत पुरोहित ने कहा कि सुदूरवर्ती क्षेत्रों में जड़ी-बूटी के संरक्षण के लिए कार्यक्रम करते रहेंगे। उत्सव ग्रुप के निदेशक डा. राकेश भट्ट ने गीतों से ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में शामिल काश्तकारों को औषधीय पौधा जटामासी, कुटकी, अमेस और तेजपात के 200 से अधिक पौधे बांटे गए। इस मौके पर प्रधानाचार्य महेंद्र सिंह राणा, बीएस मिंगवाल, विक्रम ङ्क्षसह, सुरेंद्र सिंह, प्रताप सिंह, पदम सिंह, सिरमा देवी, कमला देवी, शरादी देवी, जयवीर सिंह व शंभू प्रसाद आदि मौजूद थे।