अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर निगम प्रशासन का हाल गजब है। श्रावण मास के कांवड़ मेले में जिन अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों ने 24 घंटे मेला क्षेत्र में सफाई का काम संभाला था, वे बृहस्पतिवार को अपनी मजदूरी के लिए नगर निगम में भटकते रहे हैं। उनकी शिकायत यह है कि पूरे महीने काम करने बाद उनकी मात्र आठ दिन की हाजिरी लगाई गई है और उनकी सुनने को तैयार नहीं है। इसके विपरीत कांवड़ मेले के दौरान जिन अधिकारियों-कर्मचारियों को काम चोरी में दंडित किया था, उन्हें बुधवार को सम्मानित किया गया है।
जिन सफाई कर्मचारियों ने भारी भीड़ में भी सफाई का काम किया उनका किसी ने सम्मान समारोह में नाम लेना तक गवारा नहीं किया। उन्हें भंडारे में भी नहीं बुलाया गया। कांवड़ मेले में सफाई करने वाले कर्मियों ने रमेश कुमार, बिजेंद्र, दीपक सोमवीर, विंदर, अमित, मूलचंद, बिन्नू, आकाश, राजकुमार, अशोक कुमार, मनोज कुमार आदि ने बताया कि कांवड़ मेले से पहले उन्होंने दो महीने नाला गैंग में सफाई का काम भी किया था। उनको नौ हजार रुपये प्रतिमाह देना तय हुआ था, लेकिन उन्हें 800 से लेकर 1200 रुपये काटकर दिए गए। अब पूरे महीना काम कराने के बाद उन्हें बताया जा रहा है कि आठ दिन की ही हाजिरी लगी है, उसी का भुगतान होगा। नाला गैंग के भुगतान में हेराफेरी की शिकायतें पहले भी आई थी तब मेयर ने जांच करने तथा भुगतान बैंक में खाते के माध्यम कराने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद पुराने ढर्रें से भुगतान किया गया है।
सत्यापन के बाद करेंगे भुगतान
नगर आयुक्त अशोक कुमार पांडेय का कहना कि कांवड़ मेले के अतिरिक्त सफाई कर्मियों की जांच कराई जाएगी और सत्यापन के बाद जिसने जितने दिन काम किया होगा उतने दिन का भुगतान किया जाएगा। कांवड़ मेले के दौरान निरीक्षण में काफी कर्मचारी गायब भी मिले थे। मेयर ने भी स्थल पर कार्यरत कर्मियों की संख्या और मस्टररोल में दर्शाई गई संख्या में भी अंतर पाया था।