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बैठक को लेकर दोनों पक्ष आमन-सामने

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
श्री पंचायती अखाड़ा निर्मला कनखल के अध्यक्ष और सचिव के बीच चल रही वर्चस्व की लड़ाई में अखाड़ा से जुड़े संत भी मैदान में कूद गए हैं। पांच अगस्त को होने वाली बैठक के बारे में अध्यक्ष महंत ज्ञानदेव सिंह ने जानकारी नहीं होने की बात कही तो सचिव बलवंत सिंह ने बैठक की तैयारियां पूरी होने की बात कही। वहीं बैठक के दौरान किसी विवाद की स्थिति से निपटने को एसएसपी ने शनिवार को पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए हैं।
अखाड़ा की जनरल बॉडी ने पंचायती अखाड़ा में पांच अगस्त को बैठक बुलाई है, लेकिन अखाड़ा के अध्यक्ष महंत ज्ञानदेव सिंह के खेमे ने इससे दूरी बनाने का दावा किया। शुक्रवार को अखाड़ा में महंत ज्ञानदेव सिंह के पक्ष में आए देशभर के संत एकत्रित हुए। अध्यक्ष महंत ज्ञानदेव ने बताया कि संतों ने निर्णय लिया कि मामले को एकमत होकर निपटेंगे। कहा कि जनरल बॉडी या निर्मल समाज की बैठक बुलाने का अधिकार अध्यक्ष की स्वीकृति के बाद होता है, लेकिन उन्हें इस बाबत कोई जानकारी नहीं दी गई है। उन्नाव के सांसद अखाड़े के महामंडलेश्वर साक्षी महाराज ने कहा कि वे गद्दी के साथ हैं और अध्यक्ष का साथ देंगे। इस मौके पर पंजाब से कमलजीत सिंह, बनारस से देवेंद्र सिंह, इलाहाबाद से ज्ञान सिंह, मक्खन सिंह, प्रदीप हरि, हरदेव सिंह, बलविंदर सिंह, आचार्य स्वामी ऋषिराज शास्त्री, महंत गुरुचरण सिंह, महंत सतनाम सिंह समेत जम्मू कश्मीर, हरियाणा, बिहार, दिल्ली, यूपी आदि प्रदेशों के संत शामिल हुए। वहीं अखाड़े के सचिव बलवंत सिंह ने कहा कि जनरल बॉडी की बैठक मुखिया महंत दर्शन सिंह ने और सर्वभारत निर्मल अखाड़ा के प्रधान ने बुलाई है। जिसको लेकर देश भर से संत समाज के लोग हरिद्वार पहुंचने लगे हैं।
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अखाड़े का यह है मामला
श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा की वर्किंग कमेटी पंचायती अखाड़ा निर्मला के अध्यक्ष महंत स्वामी ज्ञानदेव सिंह ने 23 जुलाई को अखाड़े के सचिव महंत बलवंत सिंह को सचिव व मुकामी महंत के पद से हटाते हुए महंत देवेंद्र सिंह को कार्यवाहक सचिव बना दिया था। महंत बलवंत सिंह पर आरोप है कि उन्होंने अखाड़ा की निर्मला छावनी और एकड खुर्द की भूमि खुर्द-बुर्द करते हुए प्रॉपर्टी डीलरों के सुपुर्द कर दी है। स्वयं की जान खतरे में बताते हुए बलवंत सिंह ने एसएसपी व डीएम को पत्र देकर सुरक्षा की गुहार लगाई थी। जिस पर एसएसपी ने अखाड़ा में पीएसी तैनात कर रखी है। इस मामले में बलवंत सिंह के साथ अखाड़ा की जनरल बॉडी आ गई और अध्यक्ष को सचिव पद से हटाने का अधिकार उनके अधीन नहीं बताया। जिला सिविल कोर्ट ने भी अखाड़ा के संविधान पर सचिव बलवंत सिंह को बहाल रखा।
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